नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध- Essay on Nadi Ki Atmakatha in Hindi

In this article, we are providing an Essay on Nadi Ki Atmakatha in Hindi नदी की आत्मकथा निबंध हिंदी | Nibandh। Essay in 200, 300, 500, 600 words For Class 7,8,9,10,11,12 Students. Nadi Ki Atmakatha Hindi Nibandh

नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध- Essay on Nadi Ki Atmakatha in Hindi

Ek Nadi Ki Atmakatha Nibandh | Autobiography of a River in Hindi

प्रस्तावना- नदियों को किसी भी देश की जीवन रेखा की संज्ञा दी जाती है, बल्कि भारत में तो कई नदियों को मां के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन वर्तमान समय में नदियों की स्थिति किसी से भी छिपी नहीं है। अगर मैं एक नदी होता तो मैं क्या सोचता।

मेरी आत्मकथा कुछ ऐसे सुरू होती हैं कि मैं ऊंचे-ऊंचे पर्वतों से निकलकर हजारों किलोमीटर बहती चली गई, जहां से भी गुजरी लोगों की मदद के लिए अपने पानी को उनके हवाले सौंप दिया, उन्होंने मुझे मां तो कहा लेकिन कभी माँ जितना महत्व नहीं दिया। मुझमें दुनिया की तमाम गंदगी को प्रवाहित किया, भला कौन ऐसा करता है अपनी माँ के साथ।

लोगों ने मुझे जाने क्या-क्या कहा, जहां मैं लोगों के काम आई वहां मुझे पूजा गया लेकिन जहां मैं उनकी परेशानी बनी वहाँ उन्होंने मुझे शोक भी कहा।मैने किसानों के जाने कितने खेतों को सींचा, जाने कितने लोगों के लिए मैं पीने के पानी का एक मात्र साधन बनी, कई खेतों को मैंने उपजाऊ जमीन दी, कई शहरों को मैंने आपस में जोड़ा। मैंने अपने गर्भ से करोड़ों मोती निकाले, जिन्हें दुनिया ने अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किए।

मैंने बहुत सारे जीवधारियों को अपने आपमें जगह दी और उन्हें जीवन दिया, कई जीव मुझमें पलते हैं और मर कर समा जाते हैं मुझमें हमेशा के लिए। बड़ी-बड़ी कंपनियों को मैंने अपना पानी दिया, जब बरसात हुई मैंने वारिश के पानी को अपने आप में शमा लिया ।

मैंने दुनिया को यात्रा का साधन दिया। दुनिया ने मेरे पानी में गंदगी को बहाया और मुझे गंदा किया फिर भी मैंने बुरा नहीं माना और उन्हे पानी देती गई जितना उन्होंने चाहा। आज मैं गंदगी से भर गईं हूँ फिर भी मैंने दुनिया को खुशहाली देने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

लोग मुझमें कूड़ा फेंकते हैं, नालियों का पानी छोड़तें हैं, फैक्ट्रियों से निकले अपशिष्ट मुझमें प्रवाहित करते है, यहां तक कि मेरे किनारों पर शौच तक करते है लेकिन मैं मना नही कर पाई किसी को भी, मां कहा है न सबने मुझे, तुम बेटे का कर्तव्य नही निभा पाए लेकिन मैं एक माँ का कर्तव्य मिटते दम तक निभाऊंगी।

मुझे मां मानने वाले अपना कर्तव्य जाने कब निभाएंगे, जाने कब मेरे किनारे साफ-सुथरे नजर आएंगे, जाने कब मैं गंदगी रहित हो पाऊंगी, जाने कब मेरा पानी चमकेगा किसी मोती के समान, और जाने कब मैं माँ बन पाऊंगी। जब तक मेरी धारा में पानी बहता रहेगा, जब तक मेरी कोख से कल-कल की अवाज आती रहेगी मैं दुनिया को खुशहाली देती रहूंगी सदा-सर्वदा।

उपसहांर- कुछ ऐसी हैं नदी की आत्मकथा हमारे देश में। नदियों को माँ कहा जाता है लेकिन कोई भी नदियों से प्रेम नहीं करता, आज हमारे देश में नदियों की हालत बहुत खराब है, तभी तो प्रकृति अपने दिए इस अमूल्य तोहफे को वापस छीन रही हैं।  अब वो दिन दूर नही जब नदियां का अस्तित्व भी ढूंढने से मिलेगा।

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दोस्तों आपके इस लेख के ऊपर (नदी की आत्मकथा) क्या विचार है और क्या आप किसी नदी के किनारे रहते है? हमें नीचे comment करके जरूर बताइए।

नदी की आत्मकथा‘ ये हिंदी निबंध class 1,2,3,4,5,7,6,8,9 and 10  के बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल कर सकते है। यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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