Bhartiya Kisan Par Nibandh | Essay in Hindi- भारतीय किसान पर निबंध

In this article, we are providing Bhartiya Kisan Par Nibandh | Essay on Indian Farmer in Hindi भारतीय किसान पर निबंध हिंदी | Nibandh in 100, 150, 200, 250, 300, 500 words For Students & Children.

दोस्तों आज हमने Bhartiya Kisan Essay in Hindi लिखा है भारतीय किसान पर निबंध हिंदी में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, और 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है। Essay on Farmer in Hindi

Bhartiya Kisan Par Nibandh | Essay in Hindi- भारतीय किसान पर निबंध

 

Bhartiya Kisan Essay in Hindi for kids- भारतीय किसान पर निबंध ( 150 words )

भारतीय किसान का जीवन बहुत कठिन है। वह खेतों में दिन-रात कठोर परिश्रम करता है। तथा अनाज उगाकर सभी प्राणियों का पेट भरता है। सूर्योदय होते ही वह अपने हल बैल लेकर खेत पर चला जाता है तथा दिन-भर तपती धूप में भी वहीं काम करता रहता है। सर्दी-गर्मी बरसात सभी ऋतुओं में कठोर परिश्रम करने के बाद कहीं जाकर वह अपने तथा अपने परिवार के लिए दो-वक्त की रोटी जुटा पाता है।

भारतीय किसान का जीवन बहुत सादा है। वह बहुत सन्तोषी है । वह स्वयं रूखा-सूखा खाकर अपनो गुजारा कर लेता है। परन्तु संसार-भर को अन्न प्रदान करता है। यदि किसान अनाज न उगाए, तो हम भूखों मर जाएँ। किसान कभी अपने सुख-चैन तथा आराम की परवाह नहीं करता। वह तो अन्य लोगो की चिन्ता करता रहता है। इतना अधिक परिश्रम करने वाले भारतीय किसान की दशा बहुत शोचनीय है। फिर भी वह अपने कच्चे घर में अपने परिवार के साथ संतुष्ट जीवन व्यतीत करता है।

 

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Bhartiya Kisan Par Nibandh- भारतीय किसान पर निबंध ( 250 words )

भारत किसानों का देश है। हमारे देश में 80% लोग किसान हैं। ये गाँवों में रहते हैं। ये खेती पर आधारित हैं। खेती वर्षा पर निर्भर है। अधिक वर्षा, वर्षा का अभाव आदि के कारण उत्पादन घटता है। इसलिए किसानों की दयनीय स्थिति होती है। नकली बीज, नकली कृमि नाशक दवायें आदि के कारण किसानों की दशा और भी दुर्भर बन रही है।

भारत में किसान सुबह ही नींद से जाग उठते हैं। वे गाय – बैलों को चारा डालते हैं और पानी देते हैं। वे हल – बैल लेकर खेत में जाते है। कुछ किसान हल-बैल की जगह ट्रैक्टर का इस्तेमाल करते हैं। हमारे किसान कड़ी मेहनत करते हैं। वे सर्दी, गर्मी, बारिश की परवाह नहीं करते।

दुपहर में घर की स्त्रियाँ किसानों को खेतों में खाना ले जाती हैं। खाना खाकर किसान थोड़ी देर केलिए पेड़ की छाया में आराम लेते हैं। फिर वे खेती के कामों में लग जाते हैं। अब परिस्थिति में बहुत परिवर्तन आया है। खेती के आधुनिक विधानों के कारण अब किसानों को दिन-भर काम करने की जरूरत केवल कुछ ही दिन रहती है।

हमारे किसानों ने सश्य क्रांति के द्वारा उत्पादन बढ़या है। अब हमारा देश दूसरे देशों को भी अनाज आदि भेज सकता। इसीलिए हमारा किसान ‘अन्नदाता’ कहा जाता है। उसके महत्व को बताने के लिए हमारे भूत-पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान’ के साथ ‘जय किसान’ नारा भी जोड़ दिया था।

 

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Short Essay on Indian Farmer in Hindi

Bhartiya Kisan Par Nibandh

 

Essay on Indian Farmer in Hindi- भारतीय किसान पर निबंध ( 400 words )

भारत गाँवों का देश है। भारत की अस्सी प्रतिशत जनता गाँवों में ही रहती है। गाँव में अधिकतर किसान रहते हैं। बड़े-बड़े गाँवों में तो ब्राह्मण, दूकानदार, नाई, मोची, कुम्हार, अहीर आदि सब बसे हुए हैं। इसलिए बहुत से गाँव स्वावलम्बी बनते जा रहे हैं। उन्हें नगर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं। किसान गाँव की जान होता है। उसे भारतीय लोग “अन्नदाता” कहते हैं।

भारत का किसान बहुत ही परिश्रमी व्यक्ति है। वह प्रातः से सायं तक कार्य में रत रहता है। वह सवेरे उठकर खेतों में चला जाता है। पुराने समय में वह अपने साथ खेतों में बैल ले जाता था। आजकल किसान ट्रेक्टर पर अपने खेतों में जाता है। किसान खेतों में हल चलाता है, बीज बोता है और पौधों को पानी देता है। पहले वह पशुओं की सहायता से रहट चलाकर खेतों को पानी देता था। आजकल वह ट्यूबवैल चला कर खेतों को पानी देता है।

जब नन्हें नन्हें अंकुर निकल आते हैं तो वह उनकी रखवाली करता है। कभी-कभी वह सारी रात खेतों में जाग कर पशुओं से अपने खेतों की रक्षा करता है। फसल को लहराता देख किसान का मन नाच उठता है। वह अपने साथियों की सहायता से फसल काटता है और नगर की मंडी में बेच आता है। उसके साथी उसके घर के सदस्य और पड़ोसी होते हैं।

दोपहर का भोजन वह प्रायः खेतों में ही करता है। उसकी पत्नी और उसके बच्चे जब दोपहर को किसी पेड़ के नीचे उसके साथ खाना खाते हैं तो उसे बड़ा आनन्द आता है। सूर्य छिपने पर वह घर लौटता है। घर लौट कर भी उसे कार्य करना पड़ता है। वह पशुओं को चारा डालता है। गौओं और भैंसों का दूध निकाल कर वह नगर में भेजता है।

पहले किसानों की दशा बहुत बुरी थी। वे सदा ऋणी रहते थे। वे दूसरों को अनाज, फल, सब्जियाँ, दूध, घी आदि देकर स्वयं भूखे रहते थे। अब गाँवों में परिवर्तन के साथ किसान के जीवन में भी परिवर्तन आया है। वह अब कच्चे मकानों के स्थान पर पक्के मकानों में रहता है। बिजली के गाँवों में आ जाने के कारण अब वह आकाशवाणी, दूरदर्शन पर खेती के और दूसरे कार्यक्रम सुनता तथा देखता है। गाँवों में स्कूल, हस्पताल, डाकघर आदि के खुल जाने से काफी कठिनाइयाँ दूर हो गई हैं। आधुनिक ढंग से खेती करने के कारण कई किसान अधिक अन्न उपजा. कर धनी बन गए हैं।

 

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Bhartiya Kisan Par Nibandh ( 500 words ) Long Hindi Essay on Indian Farmer

भूमिका

भारतवर्ष एक कृषि-प्रधान देश है। यहाँ की अधिकाँश जनता गाँवों में रहती है और खेती करती है। खेती करने वाले लोग किसान कहलाते है।

भारतीय किसान का परिचय

किसान वह व्यक्ति है जो कठिन परिश्रम से खेतों में अन्न उपजा कर संसार के सभी प्राणियों का पेट भरता है। संसार का धनी से धनी व्यक्ति भी इसी के सहारे रहता है। उसका जीवन तपस्या से भरा है, अभिमान से परे है तथा दूसरों का हित करने वाला है। वह स्वयं भूखा रहता है पर दूसरों को भूखा नहीं रहने देता। वह सुख-दुःख में एक समान रहता है। वह ऐसा साधक और कर्मयोगी है जिसे फल की कोई इच्छा नहीं होती। वह तो बस कर्म को ही प्रधानता देता है।

परिश्रमी जीवन

भारतीय किसान का जीवन बहुत ही परिश्रम का है। चाहे गर्मी हो या सर्दी उसे तो नियमित रूप से अपने काम पर जाना है तथा दिन-रात कठोर परिश्रम करना है। जब महानगर के धनाढ्य लोक कूलर, पंखों तथा वातानुकूलित मकानों में सुख से सो रहा होता है। तो वह तेज धूप में हल-बैल लिए, नँगे पाँव, नँगे सिर अपने खेत में जाकर काम करता है। भीषण वर्षा में भी वह अपने घर पर नहीं बैठता। अभी सूर्य की पौ भी नहीं फटती है कि उठ कर अपने खेतों में काम करने चल देता है।

अभावमय जीवन

इतना अधिक परिश्रम करने पर भी उसका जीवन अभावों से परिपूर्ण है। वह कच्चे मकानों में रहता है। सादा भोजन करता है। वह आमतौर पर घर का बुना हुआ खद्दर पहनता है। वह इतना निर्धन होता है कि अचानक आ जाने वाले छोटे-मोटे खर्चों को भी वहन नहीं कर सकता है। शादी-ब्याह का अवसर हो या बीज बोने का अवसर हो उसे महाजन से कर्ज लेना ही पड़ता है। जिसे वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी उतार नहीं पाता है। वह प्रायः अशिक्षित रहता है जिसका अनेक लोग फायदा उठाते हैं।

दिनचर्या

वह प्रातः सूर्योदय से पहले ही हल तथा बैल लेकर खेत में चला जाता है। वहाँ हल चलाता है तथा खेत में पानी देता है। दोपहर को उसकी पत्नी उसके लिए भोजन लाती है। वह भोजन कर के थोड़ा विश्राम करता है। फिर सायंकाल तक पुनः काम पर जुट जाता है। सूर्य के अस्त होने पर वह अपने बैलों को लेकर घर लौट जाता है। भोजन करके वह चौपाल में चला जाता है जहाँ वह किसान भाइयों के साथ हुक्का पीता है तथा गपशप करता है।

उपसंहार

किसानों की दयनीय दशा को देखकर आजकल सरकार ने इनके सुधार के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए हैं जैसे चकबन्दी, सहकारी खेती, सस्ते दर पर ऋण, पानी व बिजली की व्यवस्था, अस्पताल व स्कूलों आदि की व्यवस्था। इनके कारण आज के किसान का जीवन-स्तर ऊँचा उठा है और वह अब खुशहाल रहने लगा है।

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इस लेख के माध्यम से हमने Bhartiya Kisan Par Nibandh | Long & Short Essay on Indian Farmer in Hindi का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।

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