Grishma Ritu | Summer Season Essay in Hindi- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध

In this article, we are providing Grishma Ritu Par Nibandh | Summer Season Essay in Hindi ग्रीष्म ऋतु पर निबंध हिंदी | Nibandh in 100, 200, 250, 300, 500, 600, 800 words For Students & Children.

दोस्तों आज हमने Grishma Ritu Lekh | Essay on Summer Season in Hindi लिखा है, ग्रीष्म ऋतु पर निबंध हिंदी में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, और 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है।

Summer Season Essay in Hindi- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध

 

Short Essay on Summer Season in Hindi- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध ( 200 words )

परिचय- गर्मी आधे फाल्गुन महीने से ही अनुभव होने लगती है और इसका असर आधे क्वार महीने तक रहता है। किन्तु ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने ग्रीष्म ऋतु के महीने हैं। इस समय खूब जोरों की गर्मी पड़ती है।

वर्णन- इस ऋतु में पेड़-पौधे मुरझा जाते हैं। कुएँ और पोखर सूख जाते हैं। इससे पानी की तकलीफ हो जाती है। कभी-कभी जोरों से आँधी या बवण्डर भी उठते हैं। मनुष्य अपने घरों में छिप जाते हैं। दोपहर को बुरी हालत हो जाती है। सारा शरीर पसीने से लथ-पथ हो जाता है। रात में देर तक नींद नहीं आती। शादियाँ भी इसी ऋतु में अधिक होती हैं। बारातों की सज-धज देखते ही बनती है।

लाभ- गर्मी पाकर इस समय बहुत से फल पकने लगते हैं। आम, जामुन, कटहल, लीची आदि रसदार फल खाने को मिलते हैं। गर्मी के असर को दूर करने के लिए लोग ठंढई और लस्सी आदि पीते हैं। इसी समय बेला, जूही आदि सुगन्धित फूल खिलते हैं।

हानि- ग्रीष्म ऋतु में लू चलती है। बार-बार पानी पीते रहने पर भी प्यास नहीं बुझती। पाचन-शक्ति बिगड़ जाती है। कभी-कभी चेचक और हैजा की बीमारी का प्रकोप हो जाया करता है। जहाँ कई अर्थों में यह ऋतु लाभदायक है, वहीं कई अथों में हानिकारक भी है।

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Grishma Ritu Par Nibandh- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध ( 250 to 300 words )

बसन्त का बस अन्त हुआ। धूप तेज होने लगी। प्रातः काल जहाँ शीतल वायु चलती थी, वहाँ अब गरम हवा चलने लगी। या फिर हवा बिल्कुल बन्द रहने लगी। ग्रीष्म ऋतु आरम्भ हो गई। यह ज्येष्ठ-आषाढ़ महीनों में होती है। कई जगह बैसाख से ज्येष्ठ के अन्त तक गर्मी पड़ती है।

दोपहर को भयंकर गर्मी पड़ती है। लगता है- सूर्य आग बरसा रहा है। धरती तवे-सी जल रही है, सनसन लूएँ चल रही हैं। लोगों के शरीर से पसीना ढल रहा है। सड़क पर निकलना कठिन हो गया है। जहाँ कोई छायादार पेड़ आ जाता है, उसके नीचे थोडी देर विश्राम करके लोग आगे चल पड़ते हैं।

स्नान से, जल पीने से, ठंडी बोतल पीने से, शिकंजी या बर्फ के पानी से चैन पड़ती है। प्रातः सायं स्नान करने से शरीर शीतल होता है। रात को ठंडी हवा चले तो नींद आ जाती है। यदि हवा बन्द हो तो नींद भी नहीं आती।

चिलबिलाती धूप में आँखें चौंधिया जाती हैं। पशु-पक्षी भी व्याकुल हो जाते हैं। वे भी छायादार पेड़ का सहारा लेकर चैन पाते हैं। कुछ लोग छाता लेकर आते-जाते हैं। छाते से कुछ-न-कुछ बचाव तो गर्मी से हो ही जाता है। बहुत से लोग रही एनक पहनते हैं। सब कहते हैं कि ग्रीष्म ऋतु बुरी है।

परन्तु गर्मी से ही खेतों में फसलें पकती हैं। बागों में फल पकते हैं। यदि गर्मी न पड़े, तो फलों की मिठास नहीं पड़ती, शरीर से पसीना नहीं निकलता, समुद्र से भाप न उठे तो बादल न बने। बादल न बने तो वर्षा कैसे हो ? इसलिए ग्रीष्म ऋतु का अपना महत्त्व है।

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Essay on Summer Season in Hindi- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध ( 600 words )

ऋतु चक्र प्रकृति का नियम है। परिवर्तन प्रकृति का स्वभाव है। इस स्वभाव के कारणही वसन्तके बाद ग्रीष्म, ग्रीष्म के बाद वर्षा तथा वर्षा के बाद शरद, शिशिर और हेमन्त ऋतुएँ आकर अपना-अपना सौन्दर्य बिखेरती हैं। जिस प्रकार दु:ख के अभाव में सुख का कोई मूल्य नहीं होता वैसे ही ग्रीष्म के अभाव में वसन्त का कोई महत्त्व न होता।

मादक वसन्त के बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। वसन्त की मन्द सुगन्ध समीर धीरे-धीरे लू का रूप धारण कर लेती हैं। वसन्त की स्फूर्ति की जगह शरीर में आलस्य आ जाता है। प्रातःकाल से ही सूर्य की किरणें असहनीय हो जाती हैं। बैसाख, जेठ और आषाढ़ गर्मियों के महीने हैं। इनमें भी जेठ के महीने में तो पृथ्वी तवे के समान तपती है। इस मौसम में मन बार-बार स्नान करने को करता है। बार-बार पानी पीने पर भी प्यास है कि बुझने का नाम ही नहीं लेती। जरा-सा चलने या काम करने पर शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। दोपहर के समय खाना खाने के बाद मन सोने के लिए करता है।

इस ऋतु में मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी सभी व्याकुल रहते हैं। गर्मी के कारण किसी का भी मन बाहर निकलने के लिए नहीं करता। नर-नारी अपने भवनों को ठंडा करके उनमें विश्राम करते हैं तो पक्षी अपने घोंसलों में। पशु घास चरने के स्थान पर वृक्षों की छाया में बैठकर जुगाली करना पसन्द करते हैं। इस ऋतु में दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं।

ग्रीष्म ऋतु में पानी अधिक पीना चाहिए क्योंकि पसीना निकलने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। गर्मियों में शीतल पेय तथा अन्य शीतल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। यही कारण है कि प्रकति ने इस ऋतु में खरबूजे, तरबूज, ककड़ी और खीरे आदि ऐसे फल दिए हैं जिनमें रस की मात्रा अधिक होती है। इसीलिए गर्मियों में शीतल पेय तथा दही की लस्सी, कुल्फी, आईसक्रीम आदि खूब बिकती हैं। छोटे-बड़े सब का मन ऐसी ही वस्तुएँ खाने को करता है।

गर्मियों का मौसम गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि गर्मियों की क रात गरीब कहीं भी लेट-बैठकर काट सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु बड़ी ही व उग्र है। परन्तु इसकी यह उग्रता मानव के लिए वरदान है। गर्मी के कारण ही फसलें पकती हैं, फल पकते हैं। सूर्य की तेज़ किरणों के न्त कारण ही पहाड़ों पर जमी बर्फ पिघलती हैं तथा इसका जल नदियों के रूप में बहकर मैदानों में आकर सिंचाई के काम आता है तथा ल प्यासों की प्यास बुझाता है। गर्मियों में जब धरती तपती है तो जमीन र के अन्दर के सब कीड़े-मकौड़े बाहर निकल आते हैं। लू चलने से मच्छर मर जाते हैं। धूप में धरती जितनी तपती है वर्षा में बोई जानी वाली फसल उतनी ही अच्छी होती है। ऐसा माना जाता है कि ग्रीष्म ऋतु वर्षा की भूमिका है। ग्रीष्म में जितनी अधिक गर्मी पड़ेगी, वर्षा ऋतु में वर्षा उतनी ही अच्छी होगी।

इस ऋतु में नदी, नाले, ताल, तलैया सब सूख जाते हैं। कमल मुरझा जाते हैं परन्तु प्रकृति की विचित्रता देखो, अमलतास तथा गुलमोहर फूलों से लद जाते हैं। सन्ध्या समय अमलतास के पीले तथा गुलमोहर के सन्तरी रंग के फूल मन को मोह लेते हैं।

मनुष्य परिश्रमी तथा बद्धिमान है। आवश्यकता आविष्कार को जननी है। वह कर्मवीर है। उसने ऐसे आविष्कार कर लिए हैं कि अब वह गर्मियों की गर्मी को भी सुखद ठण्ड में बदल लेता है। एयरकण्डीशन, कूलर, पंखे मनुष्य की आवश्यकता के अनुसार उसकी गर्मी दूर करते। हैं। वास्तव में ग्रीष्म ऋतु नारियल की भांति ऊपर से जितनी कठोर | दिखाई देती है, अन्दर से उतनी ही कोमल है।

 

Long Summer Season Essay in Hindi- ग्रीष्म ऋतु पर निबंध ( 800 words )

भूमिका

सुख के बाद दु:ख और दुःख के बाद सुख आता है। प्रकृति का यही नियम है। प्रकृति इस सच्चाई को समझाती है। बसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। प्राकृतिक दृष्टि से भारत में छः ऋतुएँ मानी जाती हैं बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। हर ऋतु का समय दो महीने का होता है। बसंत के बाद ग्रीष्म ऋतु आती है। ग्रीष्म ऋतु का समय जेष्ठ और अषाढ़ मास माने जाते हैं। जैसा कहा गया है- मधु माधवहि बसंत ऋतु, ग्रीष्म जेष्ठ–अषाढ़!

सामान्य परिचय

कुछ लोग ग्रीष्म ऋतु का काल बैसाख और जेष्ठ मानते हैं, जो सर्वथा गलत है। भारत की प्राकृतिक स्थिति भिन्न है, इसलिए यह भ्रम होता है। भारत वर्ष ग्रीष्म का देश है। जिस प्रकार यूरोप में नौ-दस महीने जाड़े के होते हैं वैसे ही हमारे देश के अधिकांश भागों में आठ-नौ महीने गर्मी रहती है। जिसे हम वर्षा ऋतु कहते हैं उसमें भी गर्मी और उमस रहती है। यह कहना सच है कि हमारा देश गर्म प्रधान है।

प्राकृतिक जीवन या अवस्था

ग्रीष्म ऋतु में प्रकृति बसंत ऋतु और वर्षा ऋतु के विपरीत होती है। इस काल की प्रकृति बिलकुल नीरस और शुष्क होती है। सूर्य की गर्मी सीमा पार कर जाती है। धूप ऐसी मालूम होती है, मानो आग की वर्षा हो रही है। धरती, हवा, जल सभी आग की भट्ठी की भाँति तपने लगते हैं। नदी-नालों, तालाबों और कुओं के जल सूख जाते हैं। घास के मैदानों, खेतों, बाग-बगीचों की हरियाली गायब हो जाती है। चारों ओर का वातावरण शुष्क, नीरस और वीरान हो जाता है। लू के गर्म झोंकों से प्रकृति सूखने लगती है। मनुष्य, पशु-पक्षी सभी गर्मी से बेचैन हो जाते हैं। सभी प्राणी छाया की शरण के लिए छटपटाने लगते हैं। हमेशा प्यास लगी रहती है। गर्मी की दोपहरी में बाहर निकलना कठिन होता है। इस ऋतु में आम, जामुन, कटहल तरबूज, खरबूजा, खीरा, लीची आदि फल बहुतायता से पाए जाते हैं।

जन-जीवन

ग्रीष्म काल के दिन अधिक कष्टकर होते हैं। इस समय चिलचिलाती धूप और ल के कारण लोगों का बाहर निकलना कठिन होता है। बहुत आवश्यक होने पर ही लोग कहीं आते-जाते हैं। प्रात:काल और सायंकाल धूप की कमी रहती है और गर्मी भी कुछ कम हो जाती है। इस समय अक्सर लोग बाहर आते-जाते हैं। शहरों के लोग सुबह-शाम घास के मैदानों, जलाशयों के किनारे तथा पार्को में अपने मित्रों या परिवार के साथ घूमने जाते हैं। गर्मी में लोग सूती कपड़े पहनते हैं। इस समय शरीर से लगातार पसीना निकलता रहता है। काम करने से थकावट बहुत जल्दी आ जाती है। गर्मी में आलस्य बहुत आता है। गांव के किसान इस असह्य गर्मी में भी अपने खेतों-खलिहानों में काम करते रहते हैं। पशु, पेड़ों की छाया में बैठे हॉफते रहते हैं। पक्षी पत्तों के झुरमुटों अथवा अपने दरबों में दुबके बैठे रहते हैं। गर्मी के दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं। लोगों के लिए दिन काटना कठिन होता है। शहरों में अमीर लोग एयरकंडीशनों में आराम करते हैं या मसूरी, कश्मीर, शिमला, दार्जिलिंग, नैनीताल जैसे ठण्डे इलाकों की सैर करने चले जाते हैं। गर्मियों में स्कूल, कालेज बन्द रहते हैं।

ग्रीष्म ऋतु के लाभ और हानी Advantages and Disadvantages of Summer Season in Hindi

ग्रीष्म काल में हमारी काम करने की शक्ति कम हो जाती है। थोड़ा काम करने पर ही थकान महसूस होने लगती है। शरीर आलस्य से घिरा रहता है। भोजन अच्छा नहीं लगता है। भोजन में लापरवाही करने से बदहजमी हो जाती है। इस ऋतु में हैजे का प्रकोप बढ़ जाता है। कई-कई क्षेत्रों में सूखा पड़ने के कारण अकाल का भयानक प्रकोप हो जाता है। धूप की गर्मी से लू चलने लगती है। लू लगने से अनेक प्राणियों की मृत्यु हो जाती है।

गर्मी से जहाँ हानियाँ हैं वहीं इससे लाभ भी है। सूर्य की गर्मी से समुद्र अथवा अन्य जलाशयों के जल सूखकर भाप बन जाते हैं जो बादल बनकर वर्षा करते हैं। अगर गर्मी न पड़े तो वर्षा भी नहीं हो सकती है। धूप से अनेक हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जाते हैं जिससे रोग नहीं फैल पाते हैं।

उपसंहार

गर्मी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर वस्तु में गुण और दोष दोनों होते हैं। गर्मी जहाँ प्राणियों को कष्ट देती है वहीं जल-भाप से बादल पैदा कर बरसात भी देती है। गर्मी से बचने के लिए हमें सावधानी रखनी चाहिए। धूप से बचना चाहिए और ठंडे पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

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इस लेख के माध्यम से हमने Grishma Ritu Par Nibandh | Summer Season Essay in Hindi का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।

ग्रीष्म ऋतु के लाभ और हानी
Advantages of Summer Season in Hindi
Disadvantages of Summer Season in Hindi
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