मेहरानगढ़ किले का इतिहास- Mehrangarh Fort History in Hindi

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मेहरानगढ़ किले का इतिहास- Mehrangarh Fort History in Hindi

मेहरानगढ़ किला भारत के सबसे विशाल किलों में से एक है। यह भारत को राज्यस्थान राज्य के जोधपुर शहर में स्थित है। यह शहर से 410 फीट की ऊँचाई पर है और इसमें बहुत से द्वार और किले हैं।

Mehrangarh Fort History in Hindi

Mehrangarh kila ka itihas मेहरानगढ़ किले का निर्माण कार्य जोधपुर के राठौर वंश के पंद्रवहे शासक राजा राव जोधा ने करवाया था। जोधपुर के शासक बनने के एक साल बाद उन्हें लगा कि मंडोर का किला उनके लिए सुरक्षित नहीं है इस लिए उन्होंने मंडोर किले से एक किलोमीटर की दुरी पर भोर चिड़िया नामक पहाड़ी जहाँ पर बहुत से पक्षी रहते थे वहाँ किला बनाने का निश्चित किया। 12 मई, 1459 को राजा राव जोधा ने इस किले की नींव रखी थी जिसे 1638-1678 के बीच में महाराज जसवंत सिंह ने पूरा किया था।

मेहरानगढ़ किले की वस्तु कला- Architecture Information about Mehrangarh Fort in Hindi

मेहरानगढ़ का किला अपनी कलाकारी और नक्काशी के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। यह ऊँची पहाड़ी पर 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और चारों तरफ से मोटी दिवारों से घिरा हुआ है। इसकी दिवारें 36 मीटर ऊँची और 21 मीटर चौड़ी है। मेहरानगढ़ किले के पास ही चामुंडा माता का मंदिर है जहाँ नवरात्रों में विशेष पुजा की जाती है। मेहरानगढ़ किले में शीश महल, फूल महल, दौलत खाने आदि उल्लेखनीय है। किले में एक म्युजियम भी है जिसमें बहुत सी ऐतिहासिक चीजें रखी गई है। इसमें तोप भी रखी है जो किले को ज्यादा सुंदरता प्रदान करती है। तिले को आकर्षक बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। इसके पास ही कीरत सिंह सोडा जो कि किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे उनके सम्मान में एक छतरी बनाई गई है जो कु गुबमद के आकार की है और राजपुतों की शान और समृद्धि का प्रतीक है।

मेहरानगढ़ किले में सात द्वार है जिसमें से चार मुख्य द्वार है-

1. जय पोल– इसे विजय का द्वार भी कहा जाता है और 1806 में इसका निर्माण महाराजा मान सिंह ने जयपुर और बिकानेर से युद्ध में जीतने की खुशी में करवाया था।

2. फतेह पोल- मुगलों से जीत की खुशी में 1707 में इसे बनाया गया था।

3. डेढ़ कंग्र पोल- इस पोल पर आज भी तोप से होने वाले हमलों का डर रहता है।

4. लोह द्वार- लोह द्वार मुख्य परिसर में बना है और किले का अंतिम द्वार है। इसकी बाईं तरफ रानियों के हाथ है जो मान सिंह के संस्कार के साथ 1843 में कुर्बान हो गई थी।

मेहरानगढ़ किले में चार बहुत ही सुंदर महल है जो सबको अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं-

1. मोती महल- इसे पर्ल पैलेस भी कहा जाता है। यह राजा सुर सिंह द्वारा बनवाया गया था और वह यहाँ पर अपनी प्रजा से मिलते थे।

2. फूल महल- यह महल राजाओं के निजी कक्ष होते थे। इसकी एक छत पर सोने से बारिकी से कारीगरी भी की गई है।

3. शीशा महल- यह महल शीशे की कलाकृतियों से भरा हुआ है।

4. झाँकी महल- झाँकी महल से शाही औरते सरकारी कार्यों पर नजर रखा करती थी।

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