खो-खो पर निबंध- Essay on My Favourite Game Kho Kho in Hindi

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खो-खो पर निबंध- Essay on My Favourite Game Kho Kho in Hindi

भारत में बहुत से खेल खेले जाते है जिनमें से खो-खो गाँव में खेले जाने वाला सबसे प्रियतम खेल हैं। इसे खेलने के लिए केवल मैदान की आवश्यकता होती है जिसमें बाहर से 10 -10 फूट जगह छोड़कर चार चार फूट ऊँचे खंभे लगाए जाते हैं। यह खेल दो टीमों के बीच में खेला जाता है जिसमें प्रत्येक टीम में 9 खिलाड़ी होते हैं। खो- खो के खेल का जन्म बड़ौदा शहर में हुआ था और यह हरियाणा, राज्यस्थान और गुजरात में मुख्य रूप से खेला जाता है। इस खेल की सबसे पहली प्रतियोगिता 1918 में पूना के जिमखाने में खेली गई थी। इस खेल को पुरूष और महिलाएँ समान रूप से ही खेल सकते हैं। यह खेल व्यक्ति को तंदुरूस्त और चुस्त रखता है।

खो-खो का मैदान 111 फूट लंबा और 51 फूट चौड़ा होता है। मैदान में दोनों खंभों की बीच की जगह को आठ बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। खेलने वाली टीमों में से एक टीम दौड़ती है और दुसरी बैठती है। धावक और चेज़र का निश्चय टॉस के द्वारा किया जाता है। बैठने वाली टीम के खिलाड़ी उन आठ समानांतर भागों में एक दुसरे की तरफ पीठ करके बैठते है और एक खिलाड़ी खंभे के पास खड़ा होता है। दौड़ने वाली टीम से तीन खिलाड़ी मैदान में आते हैं। खेल को 9-9 मिनट की पारी में खेला जाता है जिसमें बीच में 5 मिनट का ब्रेक होता है। ब्रेक के बाद दौड़ने वाली टीम बैठ जाती है और बैठी हुई टीम दौड़ने लगती है। दौड़ने वाली टीम के खिलाड़ी बैठी हुई टीम के खिलाड़ियों के बीच में चक्कर लगाते रहते हैं और प्रतिरोधक उन्हें रोकने का प्रयास करता रहता है। बैठी हुई टीम का खिलाड़ी खो कहकर और पीठ को छुकर दुसरे खिलाड़ी को भागने के लिए कहता है और उसके स्थान पर बैठ जाता है। पहले तीन खिलाड़ियों को आउट करने को बाद तीन खिलाड़ी और मैदान में आते हैं। इस तरह सबसे ज्यादा खिलाड़ियों को और कम समय में सबको आउट करने वाली टीम जीत जाती है। धावक हमेशा एक ही दिशा में दौड़ सकता है लेकिन खंभे के आयातकार में वह किसी भी दिशा में दौड़ने के लिए स्वतंत्र होता है।

खो- खो के खेल में विजय प्राप्त करने के लिए हमेशा छोटी खो देनी चाहिए और टीम में एकता होनी चाहिए। हमें इसे खेलने के लिए दिमाग से भी काम लेना चाहिए। यह खेल बहुत ही सस्ता और स्वास्थय के लिए लाभप्रद है।

# Kho Kho Essay in Hindi

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