दुर्गा पूजा पर निबंध- Essay on Durga Puja in Hindi

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दुर्गा पूजा पर निबंध- Essay on Durga Puja in Hindi

भारत पर्वों का देश है जहाँ पर सभी राष्ट्रीय और प्रांतीय त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। दुर्गा पूजा हिंदुओं का त्योहार है जो कि दुर्गा माँ की राक्षस महीषासुर के उपर विजय के रूप में मनाया जाता है। यह ज्यादातर पश्चिम बंगाल और ओड़ीसा आदि दक्षिण क्षेत्रों में मनाए जाते हैं। यह भारत के अलावा भारतीय प्रवासी देश नेपाल और बांग्लादेश में भी मनाए जाते हैं। यह अश्विन माह की षष्टी से शुरू होकर दँसवी तक मनाया जाता है। इस दिन दक्षिण में पाँच दिन का वार्षिक अवकाश होता है। दुर्गा पूजा को पुज्यो शारदो पूजा आदि के नाम से भी जाना जाता है।

दुर्गा पूजा नवरात्रि क् दौरान मनाया जाता है। दुर्गा की पूजा करके ही राम रावण युद्ध की शुरूआत होती है। दुर्गा पूजा हर जगह अलग तरीके से की जाती है और इसे शारदयो पूजा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन से शरद रितु का आगमन हो जाता है। कोलकता की दुर्गा पूजा सबसे ज्यादा विख्यात हैं। वहाँ पर सभी लोग अपने सांस्कृतिक कपड़े पहन कर दुर्गा माँ की आरती करते है और डोल नगाड़ो पर नाचते हैं।

दुर्गा पूजा के दौरान लोग नौ के नौ दिन उपवास भी रखते हैं या फिर सिर्फ पहसे और आखिरी दिन उपवास रखते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उनको दुर्गा माँ का आशीर्वाद प्राप्त होगा और उनके सारे कष्ट दुर होंगे। दुर्गा पूजा या दुर्गा उत्सव मनाने के पीछे भी एक प्राचीन कथा है कि माँ दुर्गा ने नौ दिन और नौ रात लड़ाई के पश्चात बैल असुर महीषासुर का वध किया था। नवरात्रि का अर्थ है महिषासुर से लड़ाई के नौ दिन और नौ रात। दुर्गा पूजा के समापन के दिन दुर्गा माँ की मुर्ति को नदी में विसर्जित किया जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान मेलों आदि का भी आयोजन किया जाता है।
दुर्गा पूजा पर लोग कन्याओं को भी भोजन कराते हैं। सारा वातावरण खुशी के माहैल में डूबा होता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत है। दुर्गा पूजा पर लापरवाही के कारण प्रदुषण में भी बढ़ावा मिलता है। मुर्ति सीमेंट पेंट आदि से मिलकर बनती है जो कि पानी में मिलकर जल तो दुषित करती हैं। हमें चाहिए कि हम कलाकार को बोलकर मूर्ति ऐसे पदार्थों से बनाए जिससे कि पर्यायवरण को हानि न पहुँचे। हमें दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक पर्व को बड़ी ही खुशी से मनाना चाहिए।

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