Birbal Ki Khichdi story in Hindi- बीरबल की खिचड़ी

प्रस्तुत है अकबर बीरबल की प्रसिद्व कहानी – बीरबल की खिचड़ी ( Birbal Ki Khichdi story in Hindi )

Birbal Ki Khichdi story in Hindi- बीरबल की खिचड़ी

Best Akbar Birbal Stories in Hindi

बादशाह अकबर के राज्य में एक ऐसा गरीब व्यक्ति था, जिसने लगातार अभ्यास – करके पूरी रात ठंडे पानी में खड़े रहने की काबिलियत हासिल कर ली थी। जनवरी की ठंड में भी वह पूरी रात ठंडे पानी में खडा रह सकता था। उसका यह करतब देखकर लोग हैरत से दाँतों तले उगली दबा लेते थे। एक बार कुछ लोगों ने उसे सुझाव दिया, ‘तुम अपना यह करतब शहशाह अकबर को क्यों नहीं दिखाते? इसमें कोई शक नहीं कि वे भी तुम्हारे इस करतब की दाद दिए बिना नहीं रह सकेंगे। जब वे तुमसे इनाम माँगने को कहें, तो तुम उनसे सोने की अशफियों की एक थैली मांग लेना। इससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी और तुम अपना जीवन आराम से बिता सकोगे।’ उस व्यक्ति को भी उनकी सलाह पसंद आई। अगले ही दिन वह बादशाह के दरबार में जा पहुँचा और अपने करतब के बारे में उन्हें बताया।

बादशाह बोले, ‘सिर्फ सुनकर तुम्हारी बात पर क्या भरोसा किया जाए? एक रात यमुना के पानी में खड़े होकर दिखाओ, तो मैं तुम्हें मुँहमांगा इनाम दूँगा।”

वह व्यक्ति तो इसी के लिए दरबार में आया था। वह तुरंत तैयार हो गया। उस रात वह यमुना नदी के ठंडे पानी में खड़ा रहा। अगले दिन तड़के ही बादशाह उसे देखने के लिए अपने दरबारियों के साथ वहाँ पहुँचे। जब वह व्यक्ति नदी के पानी से बाहर निकला, तो सबने देखा कि ठंड से उसके बदन का निचला हिस्सा नीला पड़ गया है। ‘तुमने पूरी रात ठंडे पानी में कैसे गुजार ली?’बादशाह ने उससे बड़ी हैरत से पूछा। ‘मैं यहाँ खड़ा आपके महल में जल रहे दीपकों को देखता रहा। इससे मुझे प्रेरणा मिलती रही।’ उस गरीब व्यक्ति ने बताया।

बादशाह अकबर के दरबार में कई ऐसे दरबारी भी थे जो किसी को कुछ मिलता देखकर जलने लगते थे। इस प्रकार के ईष्र्यालु दरबारी घुमा-फिराकर कुछ ऐसा कहते, जिससे बादशाह के मन में इनाम पाने वाले की छवि धूमिल हो जाए। गरीब आदमी की बात सुनकर ऐसा ही एक दरबारी बोल पड़ा, ‘बंदापरवर, तब तो इसने कोई बड़ा तीर नहीं मार लिया। आपके महल में जल रहे दीपकों की गर्मी की वजह से ही यह यहाँ खड़ा रह सका।’

बादशाह भी बोले, ‘तुम हमारे दीपकों की मदद लेकर ही यहाँ ठंडे पानी में खड़े रह सके हो। इसलिए तुम्हें इनाम नहीं दिया जा सकता।’ यह कहकर बादशाह दरबारियों के साथ वहाँ से चलते बने।

उन्हीं दरबारियों में से एक बीरबल भी थे। उन्हें बादशाह का यह अन्याय बिल्कुल पसंद नहीं आया था। वे गरीबों के हमदर्द थे और नहीं चाहते थे कि किसी भी गरीब के साथ अन्याय हो। उन्होंने फैसला कर लिया कि वे उस गरीब व्यक्ति को इंसाफ दिलाकर रहेंगे।

अगले दिन बीरबल दरबार में नहीं पहुँचे। जब काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए, तो बादशाह ने एक नौकर को उनका पता लगाने के लिए भेजा। थोड़ी देर बाद वह नौकर लौट आया। उसने बादशाह को बताया कि बीरबल खिचड़ी पका रहे हैं और खिचड़ी खाकर ही दरबार में आएँगे। बादशाह ने बीरबल का इंतजार करने का फैसला किया। लेकिन काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए। बादशाह ने एक नौकर को फिर उन्हें देखने के लिए भेजा। उस नौकर ने जताया था।

तब बादशाह बोले, ‘मैं खुद जाकर , देखता हूँ बीरबल कौन सी खिचड़ी पका रहा है।’ यह कहकर बादशाह स्वयं बीरबल के घर की ओर चल दिए। बीरबल के घर के पास | पहुँचकर उन्होंने देखा कि उन्होंने एक पेड़ की ऊँची शाखा से एक बर्तन लटका रखा है और उसके नीचे जमीन पर आग जल रही है।

‘यह क्या तरीका है,

बीरबल?’ बादशाह बोले, ‘क्या तुम्हें लगता है इतने नीचे जल रही आग की गर्मी खिचडी को बर्तन तक पहुँच पाएगी। इस तरह तो तुम्हारी खिचड़ी कभी नहीं बनेगी।”
” क्यों नहीं बनेगी, जहापनाह ?” बीरबल बोले,”अगर वः गरीब व्यक्ति इतनी दुरी 
पर मौजूद महल के दीपकों से रोशनी प्राप्त * कर सकता है, तो मेरी खिचड़ी का बर्तन उनके मुक़ाबले आग के काफी पास है। फिर भला आग की गर्मी मेरे बर्तन तक क्यों नहीं पहुंचेगी?”

बादशाह को अपनी गलती समझ में आ गई। वे यह भी समझ गए कि बीरबल अपनी खिचडी इतने अजीब तरीके से क्यों पका रहे थे। वे बीरबल से बोले, ‘बीरबल, मैं तुम्हारी बात का मतलब समझ गया हूँ। बेशक मैंने उस गरीब आदमी के साथ नाइंसाफी की है। मैं उस आदमी को फिर दरबार में बुलवाऊँगा और उसे उसकी मेहनत का इनाम दूँगा। अब क्या तुम अपनी खिचड़ी जल्दी पकाओगे? दरबार में तुम्हारी जरूरत है।’ 

बीरबल तुरंत उठ खड़े हुए और बादशाह के साथ दरबार की ओर चल दिए। अगले दिन ही उस गरीब व्यक्ति को दरबार में बुलाया गया। बादशाह ने उसे इतनी दौलत दे दी कि वह अपनी बांकी जिंदगी अमारान्म से बिता सके। इस तरह बीरबल ने एक गरीब आदमी की मदद की।

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