बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और तथ्य- Badrinath Temple History in Hindi

In this article, we are providing information about Badrinath Temple in Hindi- Badrinath Temple History in Hindi Language. हिस्ट्री ऑफ बद्रीनाथ टेम्पल | बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और तथ्य

बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और तथ्य- Badrinath Temple History in Hindi

बद्रीनाथ मंदिर भारत के उतराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। यह विष्णु भगवान का प्राचीनतम मंदिर है जो कि अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। यह गढ़वाल क्षेत्र के पहाड़ो के बीच में स्थित है और चार तीर्थ धामों में से सबसे पवित्र धाम है।

Badrinath Temple History in Hindi

Badrinath Dham History in Hindi मंदिर की आयु और इसके निर्माण के बारे में कोई भी स्पष्टता नहीं है लेकिन इसका जिक्र वैदिक पुराणों (1150-500 ईसा पूर्व) में मिलता है। कहा जाता है कि बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने करवाया था और वहीं अलकनंदा नदी में से भगवान विष्णु की मुर्ति लाए थे और लाकर एक गुफा में स्थापित कर दिया था। सोलवहीं सदी में गढ़वाल के राजा ने उस मूर्ति को गुफा से लाकर मंदिर में स्थापित किया था। हिमस्खलनों के कारण मंदिर बहुत बार क्षतिग्रस्त हुआ है और हर बार इसका दोबारा निर्माण किया गया है। सत्रवहीं सदी में मंदिर का विस्तार गढ़वाल के राजाओं ने करवाया था। 1803 में हिमस्खलन के कारण मंदिर को भारी नुकसान हुआ था जिसके बाद इसका निर्माण जयपुर के राजा ने करवाया था। मंदिर का निर्माण 1870 तक चल ही रहे थे हालाँकि यह प्रथम विश्व युद्ध तक बनकर तैयार हो गया था। 2006 में राज्य सरकार ने बद्रीनाथ के आस पास के क्षेत्र को नो कंस्ट्रकशन जोन घोषित कर दिया था।

बद्रीनाथ मंदिर की वस्तु कला | Architecture Information about Badrinath Temple in Hindi

बद्रीनाथ मंदिर अलकनंदा नदी से 50 मीटर की ऊँचाई पर है। इसके मुख्य द्वार का मुख नदी की तरफ है और वह धनुषाकार है। इस द्वार को सिंह द्वार भी कहा जाता है और इसके शीर्ष पर तीन स्वर्ण कलश भी है और छत के मध्य से एक घंटी लटकी हुई है।सीढ़ियों के माध्यम से प्रवेश द्वार तक पहुँचा जा सकता है। बद्रीनाथ मंदिर का मुख पत्थरों का बना है और उसमें धनुशाकार खिड़कियाँ है। मंदिर को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है- सभामंडप गर्भगृह और दर्शन मंडप।

1. सभामंडप- सभा मंडप मंदिर मेम प्रवेश करते ही आता है और यह स्तंभों से घिरा एक हॉल है। इसकी दिवारों और स्तम्भों पर नक्काशी की गई है। यहाँ पर श्रदालु आरती आदि करते हैं।

2. गर्भग्रह- सभा मंडप के बाद गर्भग्रह है जिसकी छत शंकुधारी है और 15 मीटर लंबी है। छत के उपर कपोला भी है जिसपर सोने का पानी चढ़ा है। यहाँ पर बद्रीनरायण की एक मीटर ऊँची शालीग्राम की मुर्ति है जिसके 4 हाथ है जिसमें दो हाथ ऊपर की ओर हैं और दो हाथ योगासन में बद्रीनारायण की गोद में है। जो दो हाथ ऊपर की ओर है उनमें से एक हाथ में चक्र और दुसरे में शंख है। यह मूर्ति विष्णु भगवान की स्वयं प्रकट मुर्तियों में से एक है। मंदिर परिसर में अन्य बहुत सी मुर्तियाँ है और सभी मुर्तियाँ शालीग्राम से बनी है।

बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य | Badrinath Temple Information and Facts in Hindi 

1. विष्णु भगवान के 108 दिव्य देशम में से बद्रीनाथ भी एक है।

2. बद्रीनाथ मंदिर के नीचे एक तप्त कुंड है जिसमें मंदिर में दर्शन करने जाने सो पहले हर व्यक्ति स्नान करता है। कहा जाता है कि तप्त कुंड में औषधीय गुण है जिससे सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।

3. बद्रीनाथ मंदिर साल में सिर्फ 6 महीने ही खुलता है। यह अप्रैल के अंत से लेकर नवंबर की शुरूआत तक खुला रहता है।

4. बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को रावल कहते हैं और यह दक्षिण में केरल के नम्बुदारी सम्प्रदाय को ब्रहामण होते हैं।

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