परिश्रम का महत्व निबंध- Parishram Ka Mahatva Nibandh | Essay in Hindi

In this article, we are providing Parishram Ka Mahatva Par Nibandh | Essay on My Parishram Ka Mahatva in Hindi परिश्रम का महत्व पर निबंध हिंदी | Nibandh in 100, 150, 200, 250, 300, 500 words For Students & Children.

दोस्तों आज हमने Parishram Ka Mahatva Essay in Hindi लिखा है परिश्रम का महत्व निबंध हिंदी में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, और 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है।

परिश्रम का महत्व निबंध- Parishram Ka Mahatva Nibandh | Essay in Hindi

 

परिश्रम का महत्व पर निबंध- Short Essay on Parishram Ka Mahatva ( 150 words )

अंग्रेजी विद्वान् कार्लियल ने कहा है कि काम ही पूजा है। श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा है कि काम करो। इससे काम या परिश्रम का महत्व मालूम होता है।

परिश्रम करनेवाले को इस संसार में सब-कुछ मिलता है। इसके विपरीत आलसी स्वयं कष्ट झेलता है । वह अपने परिवार, समाज तथा
देश के लिए भार स्वरूप बनता है। आलसी का मस्तिष्क शैतान का कारखाना होता है । इसलिए हरेक व्यक्ति को काम में लीन होना है। उसे बड़ी ईमानदारी से अपना काम करना है।

देश की उन्नति में मेहनती लोगों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान पर बम डाले गये थे। इससे देश का सर्वनाश हुआ था। परन्तु वहाँ के लोगों के परिश्रम से जपान कुछ ही सालों में अपना सिर ऊपर उठा सका। इसी प्रकार अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मन आदि राष्ट्रों ने वहाँ के लोगों के श्रम से बड़ी उन्नति प्राप्त की। परिश्रम के कारण ही आज का मानव चन्द्रमा पर अपना कदम रख रहा है।

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Parishram Ka Mahatva Essay in Hindi- परिश्रम का महत्व पर निबंध ( 200 words )

Parishram Ka Mahatva Anuched

परिश्रम सफलता और सुख की एकमात्र कुंजी है। साधारण जीवन जीने तथा पेट भरने के लिये भी श्रम आवश्यक है। बिना परिश्रम किये व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता। निठल्ला और अकर्मण्य व्यक्ति पृथ्वी पर निरा भार होता है। देश को, समाज को और संसार को कर्मवीरों की आवश्यकता है। बेकार, बेरोजगार और अकर्मण्य लोगों की नहीं।

परिश्रम का बड़ा महत्व है। जीवन में आज भी स्मृद्धि, विकास, आविष्कार, चमत्कार और सभ्यता दिखाई देती है, वह परिश्रम के कारण ही हैं। हमारे ऋषि-मुनियों, नेताओं, वैज्ञानिकों, विद्वानों और दूसरे महान लोगों ने इन्हें अपने अथक परिश्रम से प्राप्त किया है। उदाहरण के लिये हम अपनी स्वतंत्रता को ही लें। कितने भागीरथ प्रयत्नों, बलिदानों और सतत कठोर परिश्रम के बाद हमें यह मिली है। और अब इसको बनाये रखने के लिए, इसे सुदृढ़ करने के लिये हमें बराबर परिश्रम करते रहना चाहिये।

कर्मयोग के द्वारा ही मनुष्य सफलता, सुख और अंत में स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है। आलस्य, अर्कमण्यता और निठल्लापन पाप हैं। ये व्यक्ति को विनाश के गर्त में ले जाते हैं। संसार के सभी महान व्यक्ति बड़े परिश्रमी रहे हैं। चाहे वह नेपोलियन और अलग्जेंडर जैसे महान विजेता हों, या फिर महात्मा गांधी और मदर टेरेसा जैसे महान संत। उद्योग, ज्ञान-विज्ञान और दूसरे क्षेत्रों में भी परिश्रम का ही जयघोष सुनाई पड़ता है।

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Parishram Ka Mahatva Par Nibandh- परिश्रम का महत्व पर निबंध ( 450 words )

भूमिका

जीवन में सफलता की कुंजी परिश्रम ही है। परिश्रम के बिना कोई भी व्यक्ति महान नहीं बन सकता है। परिश्रम द्वारा हम कठिन से कठिन काम हल कर सकते हैं। परिश्रम द्वारा हम वे सभी वस्तुएँ प्राप्त कर सकते. हैं, जिनकी हमको आवश्यकता है। अतः परिश्रम वह प्रयत्न है जो कोई भी व्यक्ति अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए करता है।

परिश्रम के प्रकार

मनुष्य अपने जीवन में प्रायः दो प्रकार से श्रम करता है-मानसिक व शारीरिक। जीवन में दोनों प्रकार के श्रम का विशेष महत्त्व होता है। मानसिक श्रम बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक है तो शारीरिक श्रम • करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शारीरिक श्रम से आलस्य दूर होता है तथा पाचनक्रिया ठीक बनी रहती है। डॉक्टर, वकील व अध्यापक बनने के लिए मानसिक श्रम की आवश्यकता होती है तो किसान को शारीरिक परिश्रम करना पड़ता है।

परिश्रम का महत्त्व

निरन्तर परिश्रम किसी भी व्यक्ति को चुस्त-दुरूस्त रखता है। यह मनुष्यों को निराशाओं से दूर रखकर आशा तथा उत्साह से भरा जीवन जीना सिखाता है। जो मनुष्य पुरुषार्थी होते हैं तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मन, वचन तथा कर्म से निरन्तर कठोर परिश्रम करते रहते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। इसके विपरीत जो मनुष्य परिश्रम नहीं करते हैं, उनका जीवन दुःखों से भरा रहता है। संसार का इतिहास साक्षी है कि जो जातियाँ अर्थात् देश आज उन्नति के शिखर पर हैं, उनकी उन्नति का एक मात्र कारण उनका परिश्रमी होना है। अमेरिका तथा जापान देश इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये देश आज धन-धान्य में इतने सम्पन्न हैं कि ये अपने साथ-साथ अन्य राष्ट्रों का पोषण भी कर सकते हैं। जिस प्रकार रस्सी की लगातार रगड़ से कुएँ का भारी पत्थर तक घिस जाता है, उसी प्रकार कठिन-से-कठिन काम भी परिश्रम द्वारा सरल हो जाते हैं। महाकवि तुलसीदास जी ने कहा है-‘सकल पदारथ हैं जग माहीं, कर्महीन नर पावत नाहीं।’ अर्थात् इस संसार में सभी प्रकार . के पदार्थ विद्यमान हैं परन्तु उन्हें वे ही लोग प्राप्त कर सकते हैं जो परिश्रम करते हैं। परिश्रम ही ईश्वर की सच्ची उपासना है।

कुछ परिश्रमी महापुरुष

विश्व में अनेकों ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने कठिन परिश्रम द्वारा अपने जीवन को सफल बनाया है। उनमें से प्रमुख हैं-बाल गंगाधर तिलक, नेताजी, सुभाषचन्द्र बोस, नेपोलियन बोनापार्ट, जॉर्ज वाशिंगटन, हिटलर, अब्राहिम लिंकन आदि।

उपसंहार

यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि परिश्रम करने वाले के सामने कभी कोई बाधा नहीं आ सकती। यह विश्व अनन्त सुख-सम्पत्ति व धन-धान्य से भरा पड़ा है, परन्तु इनका भोग केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसमें परिश्रम करने की लगन है। परिश्रम के सामने तो प्रकृति भी झुक जाती है और दासी के समान कार्य करने लगती है। अत: यदि हम अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमें निरन्तर परिश्रम करते रहना चाहिए।

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Parishram Ka Mahatva Essay in Hindi- परिश्रम का महत्व पर निबंध ( 500 words )

भूमिका

हर मानव की कुछ न कुछ आवश्यकताएँ एवं इच्छाएं होती हैं । वह सुख-शान्ति की कामना करता है । दुनिया में नाम की इच्छा रखता है; किन्तु कल्पना से ही सब कार्य सिद्ध नहीं हो जाते हैं, उसके लिए परिश्रम करना पड़ता है । किसी विद्वान के शब्दों में परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं केवल मन की इच्छा मात्र से ही नहीं । जैसे सोये हुए शेर के मुख में पशु स्वयं ही प्रवेश नहीं कर जाते उसे भी परिश्रम करना पड़ता है । परिश्रम ही जीवन की सफलता का रहस्य है।

परिश्रम की जीवन में आवश्यकता

इसकी सफलता की कुंजी है विकास । मानव का सर्वांगीण शारीरिक मानसिक तथा नैतिक दृष्टियों से समुचित विकास होना चाहिये; क्योंकि किसी विशेष क्षेत्र में ही योग्यता प्राप्त करने से मानव जीवन सफल नहीं होता है । यदि मानव देह स्वस्थ नहीं है तो किसी भी कार्य को मन लगाकर नहीं कर सकता है । इसके साथ ही मानसिक शक्ति का भी विकसित होना अनिवार्य है; क्योंकि बुद्धि के बिना भी कार्य सम्पन्न नहीं । हो पाते हैं । सच्ची शान्ति की प्राप्ति के लिए आत्मिक विकास अनिवार्य है। इन सभी शक्तियों को विकसित करने में परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है और इसके बिना न तो देह स्वस्थ रह सकती है, न बुद्धि ही बढ़ सकती है और न आत्मा ही विकसित हो सकती है।

परिश्रम के लाभ

परिश्रम के बल पर मानव अपने लक्ष्य तक पहुँच सकता है। एक आलसी एवं अकर्मण्य मानव कदापि अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर सकता है । भाग्य के सहारे बैठने से सब कार्य सम्पन्न नहीं हो जाते हैं । विद्यार्थी वर्ग को भी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए अटूट श्रम करना पड़ता है, वैसे तो मानव अपने भाग्य का स्वयं विघाता होता है । परिश्रम से वह भाग्य को बना सकता है। यह उक्ति प्रसिद्ध है कि ईश्वर भी उन्ही की सहायता करता है, तो अपनी सहायता आप करते हैं।

परिश्रम से मानव का आत्मिक विकास होता है । इससे ही उसे आत्मतुष्टि मिलती है। परिश्रमी सदा अपने कार्य में लीन रहता है। व्यर्थ के धन्धों के लिए उसके पास समय नहीं होता है। फलतः उनका मन कलुषित विचारों से बचा रहता है । उसके हृदय में आत्म-विश्वास और आत्म-गौरव के गुण आ जाते हैं । उसमें हीनता की भावना समाप्त हो जाती है। वह स्वावलम्बी बन जाता है। परिश्रम के आधार पर किये गए कार्यों से ही यश की और धन की प्राप्ति होती है ।

मानव का शारीरिक विकास भी परिश्रम के ऊपर निर्भर है। जो मानव प्रातः से संध्या तक परिश्रम करता है, उसकी देह स्वस्थ और सुन्दर बन जाती है । आलसी मानव शय्या तोड़ते रहते हैं। वे सदा किसी न किसी बीमारी का शिकार रहते हैं।

उपसंहार

इस वैज्ञानिक युग में मानव यंत्रों का पुजारी बनता जा रहा है । फलतः वह आलसी बनता जा रहा है । परिश्रम की ओर से उदासीनता उसमें घर करती जा रही है । नैतिक पतन हो रहा हैं, जिससे उसकी वास्तविक शांति दूर होती जा रही हैं। इस प्रकार चहुं ओर अशान्ति का साम्रज्य है। सच्चे सुख के लिए परिश्रम को ही महत्व देना होगा। समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए परिश्रमी बनना पड़ेगा।

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इस लेख के माध्यम से हमने Parishram Ka Mahatva Par Nibandh | Essay on Parishram Ka Mahatva in Hindi का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।

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