Mera Vidyalaya | Meri Pathshala Nibandh- मेरी पाठशाला पर निबंध हिंदी में

In this article, we are providing Meri Pathshala Nibandh | Essay on My school in Hindi मेरी पाठशाला निबंध हिंदी | Nibandh in 100, 200, 250, 300, 500 words For Students & Children.

दोस्तों आज हमने Mera Vidyalaya | Meri Pathshala Nibandh in Hindi Essay लिखा है मेरी पाठशाला | मेरा विद्यालय पर निबंध हिंदी में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, और 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है।

Meri Pathshala Nibandh– मेरी पाठशाला पर निबंध

Mera Vidyalaya Nibandh in Hindi – मेरा विद्यालय निबंध हिंदी में ( 200 words )

मेरी पाठशाला का नाम ‘विवेक हाईस्कूल’ है। यह लिंक रोड, शांति कुंज में है।

मेरी पाठशाला बहुत बड़ी है। इसमें कई कमरे हैं। इन कमरों में कक्षाएँ लगती हैं। कुछ कमरों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कम्प्यूटर रूम आदि हैं । एक कमरा कार्यालय है। यहाँ हमारे प्रधानाध्यापक बैठते हैं । मेरी पाठशाला के कमरे स्वच्छ और हवादार है।

पाठशाला में अनेक शिक्षक, शिक्षिकाएँ हैं। हमारे शिक्षक बड़े योग्य हैं। वे हमें प्यार से पढ़ाते हैं। हम अपने शिक्षकों का आदर करते हैं। मेरी पाठशाला में हमें अनेक विषय पढ़ाए जाते हैं जैसे, गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी और सामान्य ज्ञान। हमें कम्प्यूटर, चित्रकारी और संगीत की भी शिक्षा दी जाती है।

पाठशाला के सामने खेल का एक बड़ा मैदान है। खेल के घंटे में हम यहाँ खेलते हैं। यही हमारे पी.टी. सर हमें पी.टी. कराते हैं। मेरी पाठशाला सुबह 8:30 पर शुरू होती है और 2 बजे दोपहर को बन्द हो जाती है। मैं हर दिन स्कूल जाता हूँ।

हमारे प्रधानाध्यापक श्रीमान रजत शर्मा हैं। वे हम बच्चों से बहुत मधुर व्यवहार करते हैं । गलती पर वे सज़ा भी देते हैं। सारे विद्यार्थी एवं शिक्षक उनका आदर करते हैं।

मेरी पाठशाला सबसे अच्छी है। मैं वहाँ हर दिन नई बातें सीखता हूँ।

 

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Essay on My School in Hindi – मेरी पाठशाला निबंध हिंदी में  ( 250 words )

मैं दिल्ली पब्लिक स्कूल का छात्र हूँ। यह विद्यालय नगर के प्रसिद्ध विद्यालयों में से एक है। इसका परीक्षा परिणाम पर प्रशंसनीय रहता है। खेल-कूद और दूसरी गतिविधियों में भी यह अग्रणी रहता है। मेरे विद्यालय की दो मंजिली इमारत तो देखते ही बनती है। इसकी एक निराली शान है। खेल के मैदान, तरणताल व छात्रावास की भी व्यवस्था है।

मेरे विद्यालय में लगभग तीन हजार छात्र-छात्राएँ शिक्षा पाते हैं। हमारे अध्यापक-अध्यापिकाओं की संख्या लगभग सौ से ऊपर है। दूसरे स्टाफ की संख्या भी बहुत है। दूर-दूर से छात्र बसों द्वारा यहाँ पढ़ने आते हैं। सारे अध्यापक बहुत अनुभवी, उच्च शिक्षा प्राप्त, प्रशिक्षित और परिश्रमशील हैं। हमारे प्रधानाचार्य तो गुणों की खान ही हैं। वे हमारे साथ बहुत ही मद् तथा पिता तुल्य व्यवहार करते हैं। अनुशासन के मामले में वे बड़े कठोर हैं। थोड़ी-सी भी लापरवाही या अव्यवस्था उन्हें सहन नहीं। लेकिन वे शारीरिक दण्ड में कम विश्वास करते हैं।

हमारे स्कूल का पुस्तकालय तो अपने आप में एक उदाहरण है। उसमें सभी विषयों की हजारों पुस्तकें हैं, विश्वकोष हैं, पत्र-पत्रिकाएँ हैं और एटलस, मानचित्र आदि हैं। वहाँ से हम पुस्तकें घर भी ले जा सकते हैं। विद्यार्थी अपना बहुत सा समय वहाँ पढ़ने-लिखने में व्यतीत करते हैं। पुस्तकालय में एक अध्यक्ष हैं और कई अन्य कर्मचारी। वे सभी हमारे साथ बड़ा सहयोग करते हैं।

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Mera Vidyalaya Nibandh – मेरा विद्यालय निबंध ( 300 words )

विद्यालय का दूसरा नाम पाठशाला या स्कूल है। बच्चों को शिक्षा देने का उत्तम स्थान है। यहाँ दूर-दूर से बच्चे पढ़ने आते हैं। शिक्षा ग्रहण करने पर बच्चे विद्वान बनते हैं और अपने भावी जीवन में सफल होते हैं।’

मेरा विदयालय रूप नगर में है। इसका नाम स डी पब्लिक स्कूल है। यह दिल्ली के माने हुए स्कूलों में से एक है। यहाँ तीन हजार बच्चे पढ़ते हैं। यहाँ एक सौ अध्यापक तथा अध्यापिकाएँ पढ़ाती हैं।

मेरे विद्यालय के दो बड़े भवन हैं। इसमें 120 कमरे हैं। हर कमरे में हवा तथा रोशनी का प्रबन्ध है। हर कमरे में श्यामपट और बिजली का पंखा लगा हुआ है। अध्यापक तथा बच्चों के लिए मेजें और कुर्सियाँ बिछी हुई हैं। वहाँ बच्चों के खेलने के लिए तीन बड़े मैदान हैं जहाँ सवेरे तथा शाम बालक और बालिकाएँ खेलते हैं।

मेरे स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों और अनुशासन का भी ध्यान रखा जाता है। हर वर्ष हमारे स्कूल में बच्चों की परीक्षा का परिणाम बड़ा अच्छा निकलता है। यहाँ दो पी. टी. मास्टर हैं जो बच्चों को सवेरे तथा शाम कई खेलों का अभ्यास कराते हैं। यहाँ एक बड़ा हॉल है जहाँ गोष्ठियाँ, वाद विवाद, प्रतियोगिताएँ आदि होती हैं। यहाँ कभी-कभी शिक्षाप्रद चलचित्र भी दिखाए जाते हैं।

मेरा विद्यालय बारहवीं कक्षा तक है। यह सवेरे सात बजे लगता है और दोपहर एक बजे बन्द हो जाता है। स्कूल की अपनी बसें हैं जो बच्चों को उनके घर से ले आती हैं और छोड़ आती हैं। स्कूल में पुस्तकों की दुकान है जहाँ से हम पुस्तकें और अभ्यास पुस्तिकाएँ खरीदते हैं। यहाँ किट शाप भी है जहाँ हम स्कूल की तैयार पोशाक खरीद सकते हैं।

मेरे विद्यालय में वाचनालय का भी प्रबन्ध है जहाँ हम समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ पढ़ते हैं। मि. नैयर हमारे स्कूल के प्रिंसिपल हैं। मुझे मेरा स्कूल बहुत अच्छा लगता है।

 

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Meri Pathshala Nibandh Essay in Hindi – मेरी पाठशाला निबंध ( 500 words )

हमारा श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय, रूपनगर विष्णुपदी गंगा के पावन तट पर अवस्थित है। इसका नामकरण बिहार-केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के उदात्त व्यक्तित्व को उजागर करता है। पटना के अशोक राजपथ से लगभग तीस किलोमीटर पर निर्मित यह विद्यामंदिर राज्य का एक प्रमुख शिक्षा-केंद्र है।

हमारे विद्यालय में लगभग सात सौ छात्र हैं तथा तीस शिक्षक। अधिकांश शिक्षक एम. ए. तथा एम. एस-सी. योग्यतावाले हैं। हमारे प्रधानाध्यापक श्री रामयश सिंह को राज्य के प्रायः सभी शिक्षाप्रेमी जानते हैं। उनका जीवन साधना एवं त्याग का जीवन है। यही कारण है कि हमारे शिक्षकगण भी उनके नेतृत्व में काम करना अपना गौरव समझते हैं। यहाँ केवल सातवें से दसवें वर्ग के छात्र पढ़ते हैं। सातवीं और आठवीं श्रेणियों में चार-चार तथा नौवीं और दसवीं श्रेणियों में तीन-तीन उपवर्ग (sections) हैं।

हमारे विद्यालय में पढ़ाई का बहुत उत्तम प्रबंध है। छात्रों को गृहकार्य भी दिया जाता है और हमारे शिक्षक छात्रों की उत्तरपुस्तिका को मनोयोगपूर्वक देखते हैं। वर्ष में दो बार आवधिक परीक्षाएँ तथा एक बार वार्षिक परीक्षा होती है। परीक्षा में किसी प्रकार का पक्षपात न हो, इसलिए प्रधानाध्यापक प्रतीक-पद्धति द्वारा विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का प्रथम पन्ना बदल देते हैं और नामों के बदले प्रतीक से काम लेते हैं। उनके इस कार्य में उपप्रधानाध्यापक सहायता पहुँचाते हैं। यद्यपि अधिकांश छात्र गाँवों से आते हैं, लेकिन दसवीं श्रेणी के सभी छात्रों का छात्रावास में रहना अनिवार्य कर दिया जाता है। छात्रावास में अंतिम कक्षा के छात्रों की विशेष पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है। यही कारण है कि हमारे यहाँ के अधिकांश छात्र मैट्रिकुलेशन परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते हैं। शायद ही कोई वर्ष ऐसा रहा हो, जब हमारे विद्यालय का कोई छात्र योग्यता-छात्रवृत्ति (merit scholarship) न ले। यही कारण है कि कई बार बिहार के शिक्षामंत्री हमारे विद्यालय में शिक्षा-व्यवस्था देखने आये और हमारे सहपाठियों के उत्तर से प्रसन्न होकर उन्होंने कई सहस्र का अनुदान दिया।

हमारे विद्यालय में एक अच्छा पुस्तकालय है, जिसमें सभी विषयों की पुस्तकें विद्यमान हैं। पुस्तकालय-भवन में ही वाचनालय है, जिसमें लगभग एक दर्जन दैनिक, मासिक तथा साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाएँ आती हैं। विद्यालय तथा छात्रावास में रेडियो है। जब कभी आकाशवाणी से विद्यालयीय कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है, तो हम राज्य के विख्यात विद्वानों की वार्ताओं से लाभान्वित होते हैं।

हमारे विद्यालय के पीछे एक बड़ा-सा आयताकार क्रीडाक्षेत्र है, जिसमें छात्र फुटबॉल, पालीबॉल, क्रिकेट, बैडमिण्टन इत्यादि खेलते हैं। शायद ही कोई वर्ष ऐसा रहा हो, जब हमारा विद्यालय कोई-न-कोई शील्ड न जीतता हो।

शिक्षण की एकरसता दूर करने तथा विशेष ज्ञानवर्द्धन के लिए हमारे प्रधानाध्यापक गोष्ठियों, पनववादों एवं भाषणों का आयोजन करवाते हैं। हमारे विद्यालय में गोस्वामी तुलसीदास की पता बड़ी धूमधाम से मनायी जाती है। तुलसी-सप्ताह के अंतर्गत सात दिनों तक रामायण-पाठ चलता है। छात्रों के बीच निबंध तथा भाषण की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। अंतिम दिन तुलसी-साहित्य के किन्हीं वरिष्ठ विद्वान का हम प्रवचन सुनते हैं तथा उनका भाषण टेप कर लेते हैं और उसे हम अपने इच्छानुसार सुनते रहते हैं।

चाहे पढ़ाई का क्षेत्र हो या क्रीड़ा का, हमारे विद्यालय का नाम प्रथम रहता है। हम छात्र अपनी सारी शक्ति लगाकर अध्ययन करते हैं, ताकि हमारे विद्यालय की प्रतिष्ठा में चार चाँद लगता रहे। हमारे आचरण पर भी हमारे गुरुजनों के सदाचरण की अमिट छाप रहती है। हमारे आचरण को देखकर “एटन’ और ‘हैरो’ के छात्रों का आचरण स्मरण हो आना स्वाभाविक-सा लगता है।

भारतवर्ष एक दिन जगद्गुरु के सर्वोच्च आसन पर विराजमान था। आज हमारे देश में शिक्षा में भले ह्रास हो गया हो, परंतु यदि हमारे विद्यालय-जैसे सभी विद्यालय हो जायँ, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश अपनी नष्टप्राय मर्यादा प्राप्त कर संसार में पुनः समादृत हो।

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इस लेख के माध्यम से हमने Mera Vidyalaya | Meri Pathshala Nibandh | My school Essay in Hindi का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।

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