Essay on Newspaper in Hindi- समाचार पत्र पर निबंध

In this article, we are providing an Essay on Newspaper in Hindi समाचार पत्र पर निबंध हिंदी में, समाचार पत्र- लाभ और हानियाँ। Nibandh in 200, 300, 500, 600, 800 words For class 3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 Short Essay on Samachar Patra in Hindi.

Essay on Newspaper in Hindi- समाचार पत्र पर निबंध

Samachar Patra Par Nibandh ( 300 words )

प्रस्तावना- सरकार की योजनाओं और उनके कार्यो के रोजाना का विवरण हमें समाचार पत्र देते हैं, हम हर रोज घर बैठे दुनिया भर की टेक्नोलॉजी और परिस्थिति को समाचार पत्र में पढ़ते हैं। असलियत में समाचार पत्र दुनिया का आइना हैं जो हमें पूरी दुनिया से रूबरू कराता है।

देश-दुनिया की हर छोटी या बड़ी खबर समाचार के पत्र से हमे पता चलता हैं। समाचार पत्र कहने को तो एक मात्र खबरों की रद्दी मात्र है, लेकिन ये कई लोगों की जीविका भी चलाती है।

पहले के समय में, समाचार पत्रों में केवल दैनिक खबर ही प्रकाशित होता था लेकिन, अब इसमें बहुत से विषयों के प्रचार और साथ ही इसमे विशेषज्ञों के विचार भी प्रकाशित होने लगे है।

समाचार पत्र पढ़ना एक अच्छी आदत है, जिसमें बड़ी खबरों के साथ ही हमारे भी क्षेत्र की खबरें भी आसानी से पढ़ने को मिलती हैं। समाचार पत्र हमें अपडेट करके रखते हैं। समाचार पत्र में खबरों के अलावा सुडोकु खेल, कविताएं, कहानियां दिए गए होते हैं, जो हमारे माइंड को और ज्यादा एक्टिव बनाते हैं।

वर्ष 1780 में द बंगाल गैजेट नाम का भारत का पहला समाचार पत्र छप कर आया था। जिसके बाद लोगों ने उसे पसंद किया और तबसे आज तक कई प्रकार के समाचार पत्र रोजाना छापे जाते हैं।

उपसंहार- समाचार पत्र सूचना के साथ-साथ अच्छी शिक्षाओं को भी लोगों तक पहुँचाता है। हम सभी को रोजाना समय निकालकर समाचार पत्र पढ़ना चाहिए। चूंकि इस समय डिजीटल खबरों का समय है जहां टेलीविजब के बाद अब स्मार्टफोन्स आ चुके हैं लेकिन जो स्थिरता समाचार पत्र में है वो सोशल मीडिया में नही।

 

Essay on Samachar Patra in Hindi ( 500 words )

भूमिका- आज समाचार-पत्र जीवन का एक आवश्यक अंग बन गया है। समाचार-पत्र की शक्ति असीम है। प्रजातंत्र शाशन में तो इसका और भी अधिक महत्व है। देश की प्रगति समाचार पत्रों पर ही निर्भर करती है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में समाचार-पत्रों एवं उनके संपादकों का विशेष योगदान रहा है। इसको किसी ने ‘जनता की सदा चलती रहने वाली पलियामेंट” कहा है।

जनता का प्रतिनिधि- आजकल समाचार-पत्र जनता के विचारों के प्रसार का सबसे बड़े साधन हैं। ये धनिकों की वस्तु न होकर जनता की वाणी हैं। ये शोषितों और दलितों की पुकार है। आज ये जनता के माता-पिता, स्कूलकॉलेज, शिक्षक, थियेटर, आदर्श और उत्प्रेरक हैं। परामर्शदाता और साथी सब कुछ हैं। ये सच्चे अर्थों में जनता के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अत: समाचार-पत्र निराश्रितों का सबसे बड़ा आश्रय हैं।

विविध सामग्री- दो अढ़ाई रुपए के समाचार-पत्र में क्या नहीं होता ? कार्टून, देश भर के महत्वपूर्ण और मनोरंजक समाचार, संपादकीय लेख, विद्वानों के लेख, नेताओं के भाषणों की रिपोर्ट, व्यापार एवं मेलों की सूचनाएँ और विशेष संस्करणों में स्त्रियों और बच्चों के उपयोग की सामग्री, पुस्तकों की आलोचना, नाटक, कहानी, धारावाहिक, उपन्यास, हास्य व्यंग्यात्मक लेख आदि विशेष सामग्री रहती है।

समाज-सुधार में योगदान- समाचार-पत्र सामाजिक कुरीतियाँ दूर करने में बड़े सहायक हैं। समाचार-पत्रों की खबरें बड़ों-बड़ों के मिजाज ठीक कर देती हैं। सरकारी नीति के प्रकाश और उसके खंडन का समाचार-पत्र सुंदर साधन हैं। इनके द्वारा शासन में सुधार भी किया जा सकता है।

व्यापार में वृदधि- समाचार-पत्र व्यापार का सर्वसुलभ साधन है। विक्रय करने वाले और क्रय करने वाले दोनों ही समाचार-पत्रों को अपनी सूचना का माध्यम बनाते हैं। इससे जितना ही लाभ साधारण जनता को होता है उतना ही व्यापारियों को। बाजार का उतार-चढ़ाव इन्हीं समाचार-पत्रों की सूचनाओं पर चलता है। व्यापारी बड़ी उत्कटा से समाचार-पत्रों को पढ़ते हैं।

विज्ञापन की सुविधा- विज्ञापन भी आज के युग में बड़े महत्वपूर्ण हो रहे हैं। प्राय: लोग विज्ञापन वाले पृष्ट को अवश्य पढ़ते हैं, क्योंकि इसी के सहारे वे अपनी जीवन यात्रा का प्रबंध करते हैं। इन विज्ञापनों में नौकरी की मांगें, वैवाहिक विज्ञापन, व्यक्तिगत सूचनाएँ और व्यापारिक विज्ञापन आदि होते हैं। चित्रपट जगत् के विज्ञापनों के लिए तो विशेष पृष्ठ होते हैं।

हानियाँ- समाचार-पत्र से कोई हानि भी न होती हो, ऐसी बात भी नहीं है। समाचार-पत्र सीमित विचारधाराओं में बंधे होते हैं। प्राय: पूँजीपति समाचार-पत्रों के मालिक होते हैं और ये अपना ही प्रचार करते हैं। कुछ समाचारपत्र सरकारी नीति की भी पक्षपात पूर्ण प्रशंसा करते हैं। कुछ ऐसे समाचार-पत्र हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य सरकार का विरोध करना है। ये दोनों बातें उचित नहीं हैं।

उपसंहार- अंत में, यह कहना आवश्यक है कि समाचार-पत्र का बड़ा महत्व है, पर उसका उत्तरदायित्व भी है कि उसके समाचार निष्पक्ष हों, किसी विशेष पार्टी या पूँजीपति के स्वार्थ का साधन न बने। आजकल के भारतीय समाचार-पत्रों में यह बड़ी कमी है। जनता की वाणी का ऐसा दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, फिर भी यह निर्विवाद है किं भारत में पत्राकारिता का भविष्य उज्वल है और विशेषकर हिंदी समाचार पत्रों का । पत्र संपादक को अपना दायित्व भली प्रकार समझना चाहिए।

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