Essay on Delhi in Hindi- भारत की राजधानी दिल्ली पर निबंध

In this article, we are providing Essay on Delhi in Hindi. भारत की राजधानी दिल्ली पर निबंध- ऐतिहासिक महत्त्व, राजघाट तथा शांति वन, चाँदनी चौक व कुतुबमीनार, राष्ट्रपति भवन

Essay on Delhi in Hindi- भारत की राजधानी दिल्ली पर निबंध

भारत की राजधानी—भारत एक प्राचीन देश है। इसकी संस्कृति पुरानी है, इतिहास भी पुराना है। नगर, प्रत्येक ग्राम कोई न कोई ऐतिहासिक कथा संजोए हुए है। प्रस्तुत निबंध में मैं दिल्ली की यात्रा का वर्णन करने जा रहा हूँ। दिल्ली भारत की राजधानी है। भारत का ‘दिल’ है। यमुना के किनारी बसा यह नगर दो भागों में अ है–पुरानी दिल्ली तथा नई दिल्ली।

ऐतिहासिक महत्त्व- इतिहास की दृष्टि से पुरानी दिल्ली का महत्त्व अधिक है जबकि नवीन शोखियों के कारण नई दिल्ली सभी के आकर्षण का केंद्र है। देश की राजधानी होने के कारण देश के सभी भागों से रेलगाड़ियाँ, बसें, विमान आदि यहाँ पहुँचते हैं। |

लाल किला- फरवरी मास में हमें अपने विद्यालय की ओर से दिल्ली की यात्रा के लिए ले जाया गया है। दस छात्र थे, हमारे साथ थे हमारे इतिहास के अध्यापक। हमने अपना सामान ‘क्लॉक रूम’ में रखा और नाश्ता करक हम लाल किला देखने चल पड़े। लाल पत्थर का यह किला शाहजहां ने बनवाया था- ऐसा माना जाता है। दिल्ली से पहले मुग़लों की राजधानी आगरा थी। यह लाल किला मुग़ल वंश के इतिहास के साथ तो जुड़ा ही है, स्वतंत्र भारत के लिए भी इसका महत्त्व कम नहीं है।

नेता जी सुभाष की याद- लाल किले को देखकर नेता जी सुभाष चंद्र बोस की याद ताजा हो उठी। उन्होंने इसी किले पर अपने राष्ट्र का ध्वज फहराने का संकल्प किया था और अब हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस को प्रधा तिरंगा झंडा फहरा कर यहीं से राष्ट्र के नाम अपने संदेश प्रसारित करते हैं। आज़ाद हिंद सेना के वीरों पर मुकद्दमा भी इसी किले में चलाया गया था। अब यहाँ राष्ट्रीय अजायब घर है, जिसमें ऐतिहासिक महत्त्व की अनेक वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं।

चाँदनी चौक व कुतुबमीनार- लाल किले के सामने चाँदनी चौक है। यह भी मुगलों के समय का महत्त्वपूर्ण बाजार है। इसका महत्त्व अब भी कम नहीं हुआ है। यहाँ से हम बस में बैठ कर कुतुबमीनार पहुँचे। बहुत-से इतिहासकारों का मत है कि कुतुबमीनार कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा निर्मित करवायी गई थी, किंतु कुछ अन्य इतिहासकार इसे एक भारतीय सम्राट् द्वारा निर्मित ध्रुवस्तंभ मानते हैं। उनके मतानुसार इसका निर्माण ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार नक्षत्रों और ग्रहों का अध्ययन करने के लिए करवाया गया था। वे इसका संबंध कुछ दूरी पर बनी ‘जंतर मंतर’ नामक खुली वेधशाला से जोड़ते हैं जहाँ नक्षत्रों आदि की गति जानने के लिए काफी विशद् प्रबंध किये गए हैं। ‘जंतर-मंतर’ को देखकर हम अपने पूर्वजों की वैज्ञानिक दृष्टि पर आश्चर्यचकित रह गए।

बिरला मंदिर- अब हम लोग बिरला मंदिर गए। इसी मंदिर में प्रार्थना सभा में राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की हत्या की गई थी। इस मंदिर को सभी संप्रदायों के देवताओं और महापुरुषों से संबंधित करके राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनाने की कोशिश की गई है। यहीं हमने भोजन भी किया।

राष्ट्रपति भवन- अब हम लोग संसद् भवन, सचिवालय तथा राष्ट्रपति भवन देखने गए। सौभाग्य से राष्ट्रपति भवन के मुग़ल-बाग दर्शकों के लिए खुले थे। इन्हें केवल फरवरी मास में ही खोला जाता है। असंख्य फूलों से भरे इस उपवन ने हमारे मन मोह लिए। सुंदर मोर और हिरण यहां विचर रहे थे। लगभग एक घंटा वहाँ रुकने के बाद हम होटल लौट आए।

राजघाट तथा शांति वन- कुछ देर आराम करने के पश्चात् हम राजघाट तथा शांति वन गए। यहाँ क्रमशः महात्मा गाँधी तथा जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री की समाधि देखने विजयघाट भी गए। लौटते समय हम जामा मस्जिद भी गए। यहाँ से सभी लोग स्कूटरों पर बैठ कर कनाट प्लेस चले। दिल्ली। का सारा सौंदर्य शाम को यहाँ उमड़ आता है। यहाँ हमने टी हाउस में चाय पी थी। भीड़ को देखकर तो हम एकदम ही दंग रह गए। हम वहाँ अधिक देर नहीं ठहर सके, क्योंकि रात की गाड़ी से हमें लौटना भी तो था।

उपसंहार- दिल्ली भारत का ही नहीं विश्व का एक प्रमुख शहर है। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थान हैं। मैं समझता हूँ दिल्ली के भ्रमण के लिए कम-से-कम एक सप्ताह का कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए।

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