स्वर्ण मंदिर पर निबंध- Essay on Golden Temple in Hindi

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स्वर्ण मंदिर पर निबंध- Essay on Golden Temple in Hindi

स्वर्ण मंदिर पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है और सिक्खों का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। यहाँ पर हर धर्म के लोग जाते हैं। इसे हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है जिसका मतलब है भगवान का मंदिर। सिक्ख यहाँ पर किसी खास दिन जैसे जन्मदिन, विवाह आदि पर अवश्य जाते हैं। यहाँ पर दुनिया का दुसरा सबसे बड़ा लंगर लगता है और लाखों लोग उस लंगर को खाते हैं। यहाँ पर हलवे की व्यवस्था हमेशा रहती है। हरमंदिर साहब में प्रवेश करने के चार द्वार है जो कि यह दर्शाते है कि दुनिया कि किसी भी दिशा से किसी भी धर्म को लोग यहाँ आ सकते हैं। मंदिर के बीच में एक बहुत बड़ा सरोवर है जिसे सबसे पवित्र सरोवर माना जाता है। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से उस सरोवर में स्नान करे तो उसकी सारी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती है।

स्वर्ण मंदिर का इतिहास ( History of Golden Temple in Hindi )- स्वर्ण मंदिर को सिक्खों के पाँचवे गुरू श्री अर्जुन देव ने बनवाया था। उन्होंने 1588 में लाहौर में रहने वाले संत मिया मीर द्वारा हरमंदिर साहब की नींव रखवाई थी। सिक्खों के चौथे गुरू रामदास ने तालाब का निर्माण करवाया था। 1601 ई. में स्वर्ण मंदिर बनने के तैयार हुआ था। इसे बनाने के लिए जमीन मुगल सम्राट अकबर से खरीदी गई थी। इस पर बहुत बार हमले किए गए पर हर बार इसका पुनः निर्माण किया गया।

सर्वप्रथम स्वर्ण मंदिर को बलुआ और लाल पत्थरों से बनाया गया था। बाद में इसे सफेद मार्बल से बनाया गया और इसके ऊपर सोने की परत भी चढ़ाई गई जो कि इसे बहुत ही सुंदर बनाती है। इसे देखने हर वर्ष 40 लाख से ज्यादा दर्शक आते हैं। यहाँ पर सभी त्योहार बड़ी धुमधाम से मनाए जाते हैं। सभी सिक्ख अपनी जिंदगी में एक बार हरमंदिर साहब जरूर जाना चाहते हैं।

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