ट्रिपल तलाक पर निबंध- Triple Talaq Essay in Hindi

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ट्रिपल तलाक पर निबंध- Triple Talaq Essay in Hindi

भूमिका- ट्रीपल तलाक इस्लाम धर्म में दिया जाने वाला तलाक है जीसे तलाक-ए-बिद्त के नाम से भी जाना जाता है। निकाह अथवा विवाह एक बहुत ही पवित्र रिश्ता होता है जिसमें लड़का और लड़की अपनी मर्जी से बंधते हैं। ट्रीपल तलाक के तहत पुरूष एक बार में ही तीन बार तलाक बोलकर, या फिर पत्र, एस-ऐम-एस या फिर इलैक्टरोनिक माध्यम से तीन तलाक भेजकर अपनी पत्नी से तलाक ले सकता है जो कि एक तरफा है। ट्रीपल तलाक का यह तरीका भारत में मुस्लमानों के द्वारा अपनाया जाता है।

कुरान के अनुसार- इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक कुरान के अनुसार तलाक न लेने की सलाह दी गई है। उसके अनुसार व्यक्ति को बैठकर सलाह मश्वरा करना चाहिए और अपनी पत्नी से संवाद करना चाहिए और बात को सुलझाना चाहिए। कुरान में कहीं पर भी तीन तलाक का जिक्र नहीं किया गया है जिसका मतलब यह है कि तीन तलाक निरस्त किया जा सकता है।

महिलाओं पर प्रभाव- ट्रीपल तल्क के कारण मुस्लिम महिलाओं के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। पुरूष का जब दिल करता है वह तलाक बोलकर महिला से रिश्ता खत्म कर देता है और उसे घर से बाहर निकाल देता है। भारत पूरे विश्व में मुस्लमानों की सबसे ज्यादा संख्या वाला तीसरा देश है जिसमें लगभग अब तक 65 करोड़ महिलाओं को तलाक दिया जा चुका है। उन्हें तलाक सिर्फ बोलकर ट्रीपल तलाक के माध्यम से ही दिया गया है जिससे महिलाओं के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं।

सरकारी निर्णय- ट्रीपल तलाक के केस अगस्त 2017 में बहुत ज्यादा मात्रा में दर्ज किए जाने लगे और इस्लामि महिलाओं ने न्यायिक तलाक की माँग की। 28 दिसंबर, 2017 को मुस्लिम महिला विवाह अधिकार सरंक्षण विधेयक, 2017 को पारित किया था और प्रधान न्यायधीश की पाँच संगठन वाली समीति ने ट्रीपल तलाक को निरस्त कर दिया है और यदि कोई पति ट्रीपल तलाक देता है तो वह मान्य नहीं होगा और उसे तीन साल की सजा दी जाऐगी।

निष्कर्ष- ट्रीपल तलाक की वजह से महिलाओं का शोषण हो रहा था और उन्हें अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा था। ट्रीपल तलाक का पुरूषों के द्वारा प्रयोग अन्याय था जिसे खारिज किया जाना बहुत जरूरी था। कुछ मुस्लिम ट्रीपल तलाक को इस्लाम धर्म से जोड़ते थे जबकि कुरान में इसका जिक्र कहीं भी नहीं है। सरकार ने ट्रीपल तलाक को निरस्त कर इस्लामिक महिलाओं को न्याय दिलाया है। बहुत सारे देशों में जहाँ मुस्लमानों की संख्या ज्यादा है वहाँ ट्रीपल तलाक पर पहले ही प्रतिबंध लग चुका था।

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