शिक्षा का माध्यम निबंध- Shiksha Ka Madhyam Essay in Hindi

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शिक्षा का माध्यम निबंध- Shiksha Ka Madhyam Essay in Hindi

 

शिक्षा का माध्यम मातृभाषा पर निबंध

यहाँ शिक्षा का माध्यम क्या हो ? इस सम्बन्ध में विभिन्न प्रकार की विचारधाराएँ देखने को मिलती हैं। अनेक व्यक्ति अंग्रेजी के पक्षधर हैं। उनका विचार है कि अंग्रेजी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो विद्यालयों में शिक्षा के माध्यम के रूप में प्रयोग की जानी चाहिए। जबकि अन्य ऐसे लोग भी हैं, जो शिक्षा का माध्यम क्षेत्रीय भाषाए या हिन्दी को बनाना अधिक श्रेयकर समझते हैं। सबसे बड़ी कठिनाई भारत में यह है कि भारत एक विशाल देश है जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं और बहुत सी भाषाओं का साहित्य भी प्रर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अतः एक सामान्य भाषा बनाये जाने के सम्बन्ध में प्रायः विवाद उठ खड़ा होता है।

कुछ लोगों का विचार है कि अंग्रेजी ही शिक्षा का माध्यम होनी चाहिए और यह विश्व के अधिकांश देशों में बोली जाने वाली भाषा है। ज्ञान-विज्ञान का अधिकांश साहित्य अंग्रेजी में उपलब्ध है। यदि हम दूसरे देशों के तकनीकी ज्ञान को सहज ही प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें अंग्रेजी को अपनाना चाहिए परन्तु इसके पीछे सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि यह एक विदेशी भाषा होने के कारण विद्यार्थियों की समझ में शीघ्र नहीं आती और परीक्षा में अधिकांश विद्यार्थियों के अनुतीर्ण होने का मूल कारण अंग्रेजी ही है।

यह एक निर्विवाद सत्य है कि कम से कम समय में अधिक से अधिक ज्ञान हम मातृभाषा के माध्यम से ही प्नाप्त कर सकते हैं। विदेशी भाषा के स्थान पर अपनी मातृभाषा में हर अपने विचारों को ठीक प्रकार व्यक्त कर सकते हैं। यदि हम क्षेत्रीय भाषा में को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाते हैं तो निश्चय ही ज्ञान बिज्ञान की पुस्तकें क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होंगी। कई भारतीय भाषाए आज इस स्थिति में हैं कि सरलता से शिक्षा का माध्यम सफलतापूर्वक बन सकती हैं।

रूस, इटली, जर्मनी, फ्राँस और जापान आज अपनी मातृ- भाषाओं को अपनाए हुये हैं, परन्तु ज्ञान और विज्ञान में संसार के अनेक राष्ट्रों से बहुत आगे हैं। देश की स्वतन्त्रता के पश्चात् संविधान सभा ने सर्वसम्मति से हिन्दी को राजभाषा और राष्ट्र- भाषा का स्तर देने का निश्चय किया। शिक्षा सुधार के लिए स्था- पित खरे कमीशन, राधाकृष्णन कमीशन और कोठारी कमीशन ने माध्यमिक कक्षाओं तक प्रादेशिक भाषाओं को शिक्षा का माध्यम रखने का सुझाव दिया। साथ ही त्रिभाषा फार्मूला शिक्षा के माध्यम के रूप में स्वीकार किया गया। विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षा के माध्यम के रूप में हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं को मान्यता दी गई ।

वास्तव में शिक्षा का माध्यम हिन्दी होनी चाहिए और इसके साथ ही साथ माध्यमिक कक्षाओं तक शिक्षा प्रादेशिक भाषाओं में दी जानी चाहिए। संसार की अन्य भाषायें भी ज्ञानवृद्धि के लिए पढ़नी चाहिए । प्रारम्भिक कक्षाओं में शिक्षा का माध्यम मातृ- भाषा होनी चाहिए, माध्यमिक स्तर पर राष्ट्रभाषा हिन्दी ही होनी चाहिए। विदेशी भाषा को कभी भी शिक्षा का माध्यम बनाया जाना परतन्त्रता को अंगीकार करना है। हमें आपस के क्षेत्रीयता और भाषाओं के विवादों में न पड़कर सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।

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