छुट्टी का दिन पर निबंध- Chutti ka din Essay in Hindi

In this article, we are providing Chutti ka din Essay in Hindi छुट्टी का दिन पर निबंध | Essay on Holiday in Hindi | Nibandh in 200, 300, 500 words For Students. Chutti ka din Hindi Nibandh

छुट्टी का दिन पर निबंध- Chutti ka din Essay in Hindi

 

( Essay-1 ) Chutti ka din Essay in Hindi 150 words for kids

रविवार का दिन था। सुबह मेरी आँख खुलीं तो पाया, पिता जी सैर के लिए तैयार हो रहे थे।

मैं भी झटपट उठ बैठा और नित्यकर्म से निबटकर उनके साथ चल दिया। हम पार्क में पहुँचे। पिता जी तेज़-तेज़ कदमों से पार्क के चारों ओर बनी पगडंडी पर चल रहे थे। मैंने भी उनके साथ एक चक्कर लगाया। थोड़ा व्यायाम किया और झूला भी झूला ।

घर आकर नहा-धोकर मैंने दूध पिया और नाश्ता किया। पिता जी द्वारा लाई गई कार्टून फिल्म देखी। फिल्म देखते हुए मैं बहुत हँसा । एक घंटे में मैंने अपना स्कूल का कार्य समाप्त किया और दोपहर का खाना खाकर थोड़ी देर सो गया ।

शाम को मैं माँ-पिता जी के साथ बुद्धजयन्ती पार्क गया। माँ और पिता जी तो घास पर बैठ गए पर मैंने वहाँ कुछ मित्र बनाए और उनके साथ गेंद से खूब खेला। हरी-हरी घास, रंग-बिरंगे फूल और पत्ते देखे। हवा में झूमते वृक्षों पर पक्षियों को झूलते देखा। यह सब मुझे बहुत अच्छा लगा। कभी-कभी मन सोचता है कि हर दिन रविवार क्यों नहीं होता !

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( Essay-2 ) छुट्टी का दिन पर निबंध- Chutti ka din Essay in Hindi ( 250 words )

हर रविवार हमें स्कूल में छुट्टी होती है। इस दिन की हम प्रतीक्षा करते हैं। सप्ताह के किसी और दिन भी छुट्टी हो जाए तो हम उसका स्वागत करते हैं।

गत रविवार प्रातः सात बजे मैं नहा-धोकर तैयार हो गया। मेरा मित्र ठीक साढ़े सात बजे मेरे घर पहुँच गया। हम अपनी कार पर सवार होकर दिल्ली के प्रसिद्ध स्थानों को देखने के लिए घर से निकले। सबसे पहले हमने लालकिला देखा। इसे शाहजहाँ ने बनवाया था। इसमें एक सुन्दर संग्रहालय है । वहाँ हमने दीवाने – आम, दीवाने खास और स्नानघर भी देखे ।

इसके बाद हमने गुरुद्वारा शीशगंज और जामा मस्जिद देखी। इसके बाद हम चिड़िया घर देखने के लिए गए। वहाँ हमने देश-विदेश के पश और पक्षी देखे। दोपहर का भोजन भी हमने वहाँ खाया। इसके बाद हमने पुराना किला और हुमायूँ का मकबरा देखा । ये देखने के बाद हम ओखला पहुँचे। यमुना नदी के किनारे स्थित पिकनिक के सुन्दर स्थान पर पहुँ- कर हमने आम खाए और शरबत पिया।

ओखला से हम कुतुबमीनार देखने गए। यह एक बहुत ऊँची मीनार है। कुतुबमीनार देखने के बाद हमने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, आकाशवाणी भवन और जंतर मंतर देखा। शाम की चाय हमने कनाट प्लेस में स्थित काफी हाऊस में पी।

अब हम बहुत थक चुके थे। शाम के छः बज चुके थे। अतः हम अपनी कार पर सवार होकर साढ़े छः बजे घर पहुँचे। घर पर पहुँच कर दूरदर्शन पर हमने “उलझन” चलचित्र देखा। इसके मुख्य कलाकार अशोक कुमार, संजीव कुमार और सुलक्षणा पंडित थे। यह चलचित्र मुझे अच्छा लगा। रमेश मेरे घर रात का खाना खाकर दस बजे अपने घर चला गया और मैं थोड़ी देर बाद सो गया। इस छुट्टी के दिन मुझे बड़ा मजा आया।

 

( Essay-3 ) Chutti ka din Essay in Hindi | Essay on Holiday in Hindi ( 300 words )

छुट्टी के दिन बड़े मज़े के होते हैं। पढ़ाई कम और खेल-कूद ज्यादा ।

रविवार छुट्टी का दिन था । मैं सुबह जल्दी उठा । नहा-धोकर जलपान किया । छुट्टियों के दिन माँ तरह तरह के पकवान बनाती हैं ।
जलपान के बाद दीदी और मैंने अपनी पुस्तकों की आलमारी को साफ किया । अपनी किताबों को अच्छे से रखा । हमने अपना कमरा भी साफ किया । फिर हमने टी.वी. पर ‘कार्टून शो’ देखा ।

कार्टूनों की हरकतों से हम हँसते-हँसते लोट पोट हो गए । कार्टून शो खत्म होने के बाद मैं बाहर दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया । खेल में मुझे समय की सुध ही नहीं रही । दीदी बुलाने आई, तो पता चला दोपहर के एक बज रहे हैं ।

हमने साथ खाना खाया। थोड़ी देर आराम किया । प्रत्येक रविवार को पिताजी दीदी को एक पुस्तक देते हैं। पुस्तक में महापुरुषों की जीवनी या सुन्दर शिक्षाप्रद कहानियाँ होती हैं । साथ में सुन्दर रंगीन चित्र भी होते हैं । आराम करते हुए दीदी ने मुझे भगवान बुद्ध और अंगूलीमार की कथा सुनाई ।

उठने के बाद दीदी और मैंने पाठशाला का गृहकार्य किया । थोड़ी देर चित्रकारी की। शाम में पिताजी हमें शालीमार पार्क ले गए। वहाँ का वातावरण बहुत सुहाना था । पार्क के तालाब में लोग नौका विहार कर रहे। । जगह-जगह पर लोग बैठे थे । बच्चे खेल में मग्न थे । हमने भी नौका। विहार किया । मैं और दीदी बच्चों के साथ खेलने लगे ।

अँधेरा हो जाने पर पार्क रौशनी से जगमगा उठा । हम पार्क के बाहर आए । बाहर चाट-पकौड़ी, भेल, आईसक्रीम की दूकानें थीं । हमने पानी पुरी और आईसक्रीम खाया |

घर लौटते समय मैं सोच रहा था कितना अच्छा दिन था । काश ! छुट्टी का दिन कुछ और बड़ा होता ।

 

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‘छुट्टी का दिन पर निबंध’ ये हिंदी निबंध class 1,2,3,4,5,7,6,8,9,10,11 and 12 के बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल कर सकते है। यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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