Rabbit and Tortoise Story in Hindi | खरगोश और कछुवा की कहानी हिंदी में

In this article, we are sharing a Moral story- Rabbit and Tortoise Story in Hindi- Khargosh aur Kachhua Ki Kahani with Moral for students and Kids.

Rabbit and Tortoise Story in Hindi

खरगोश और कछुवा की कहानी हिंदी में

किसी वन में एक खरगोश रहता था। वह तेज भाग सकता था। उसे अपनी गति पर अभिमान था। वह तालाब के समीप रहने वाले कछुवे की मन्द-गति का मजाक उड़ाया करता था। कछुवे को यद्यपि यह बात बुरी लगती थी, फिर भी वह चुपके से सहन कर जाता था।

एक दिन खरगोश ने कछुवे को सबके सामने अपमानित किया और उसे दौड़ का मुकाबला करने के लिए ललकारा। कछुवे ने वह चुनौती स्वीकार कर ली। दूर स्थित एक पेड़ को निर्णय का स्थान माना गया। जब दौड़ आरम्भ हुई तो खरगोश उछल-उछल कर आगे निकलने लगा और थोड़ी ही देर में आँखों से ओझल हो गया। बहुत तेज उछल-कूद के कारण खरगोश थक गया। अतः मार्ग में थोड़ी देर विश्राम करने के लिए वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। लेटते ही उसे नींद आ गई।

कछुवा लगातार एक ही गति से चलता-चलता सोए हुए खरगोश के समीप पहुँचा। उसे बिना जगाए वह आगे बढ़ता गया और निश्चित स्थान पर पहुँच गया। नींद खुलते ही खरगोश तेज भागा। कछुए को निश्चित स्थान पर पहले से पहुँचा देख कर वह बहुत शर्मिन्दा हुआ। अभिमान के कारण उसका सिर नीचा हो गया।

शिक्षा- अभिमान का सिर नीचा।

 

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