ग्रीष्म ऋतु पर निबंध- Essay on Summer Season in Hindi

In this article, we are providing Essay on Summer Season in Hindi. In this essay, you get to know about Summer Season in Hindi. ग्रीष्म ऋतु पर निबंध (Grishma Ritu Nibandh)

ग्रीष्म ऋतु पर निबंध- Essay on Summer Season in Hindi

भारतवासियों का यह सौभाग्य है कि वे हर दो मास के बाद नई ऋतु का आनंद प्राप्त करते हैं। फसलों को पकाने के लिए इस ऋतु का विशेष महत्त्व है। ऋतुराज की समाप्ति पर प्रकृति के प्रांगण में ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। यह 15 मई से आरंभ हो जाती है, जून का महीना कड़ाके की गर्मी का महीना होता है। बसंत ऋतु में चलने वाली बसंती हवा ग्रीष्म ऋतु के आते ही गर्म हवा में बदल जाती है। इस गर्म हवा को ‘लू’ कहते हैं। ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ होते ही सूर्य नारायण आकाश रूपी खिड़की से क्रोध भरी दृष्टि से देखने लग जाते हैं।

सूर्य का प्रकाश धरती पर लंबे रूप में पड़ता है इसलिए भूमि गर्म तवे की भाँति तपकर लाल हो जाती है। वनस्पति-जगत् पर हरियाली समाप्त हो जाती है। किसान के लाख प्रयत्न करने के बाद भी कृषि मुरझाई रहती है। पक्षी घोंसलों में दुबककर समय बिता रहे होते हैं। पत्थर भी धूप में पड़े-पड़े गर्म हो जाते हैं। सबका गर्मी के कारण बुरा हाल होता है।

ग्रीष्म ऋतु देखने में कठोर लेकिन बहुत लाभकारी होती है। यह ऋतु करोड़ों लोगों के लिए अनाज पकाकर तैयार कर देती है, वर्षा के फालतू जल को सुखाकर मच्छर और मलेरिया को समाप्त कर देती है, तालाबों-नदियों आदि के जल को वाष्पित करके वर्षा करती है, पहाड़ों पर पड़ी हुई बर्फ को पिघलाकर नदियों का जल-प्रवाह नियमित रखती है, इससे सिचाई का कार्य वर्षभर चलता रहता है, यह ऋतु फलदायिनी है तथा इसमें अरबों का व्यापार होता है। ग्रीष्म ऋतु एक नीम के वृक्ष की भांति है। यह खाने में चाहे कड़वी होती है, लेकिन यह बहुत गुणकारी होती है। इसमें कई बीमारियों की दवाइयाँ बनती हैं। इस प्रकार ग्रीष्म ऋतु अनाज को तैयार करने, फलों को पकाने के काम आती है।

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