विद्यार्थी और अनुशासन पर निबन्ध- Essay on Student and Discipline in Hindi

In this article, we are providing an Essay on Student and Discipline in Hindi / Essay on Vidyarthi Aur Anushasan in Hindi. विद्यार्थी और अनुशासन पर निबन्ध, विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्त्व, अनुशासन का अर्थ in 100, 200, 300,400, 500 words For Students & Children.

दोस्तों आज हमने Vidyarthi Aur Anushasan Nibandh in Hindi लिखा है, विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध हिंदी में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, और 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है।

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबन्ध- Essay on Student and Discipline in Hindi

Vidyarthi Aur Anushasan Essay in Hindi विद्यार्थी और अनुशासन निबंध ( 250 words )

सम्बन्धित नियमों का पालन करना ही अनुशासन है । प्रकति में सर्व ग्रह आदि अनुशासन बद्ध हैं । इसलिए हजारों वर्षों से उनकी गति क्रम में चल रही है।

हर व्यक्ति को अनुशासन आवश्यक है। विद्यार्थी को तो अनुशासन की अधिक आवश्यकता होती है। इसके कई कारण हैं। विद्यार्थी का मन कच्चा होता है। वह बड़ा चंचल होता है। वह ऊपरी तड़क-भड़क देखकर मित्र बनाता है। उस पर फिल्मों तथा हल्के मनोरंजन की पुस्तकों का भी बुरा प्रभाव पड़ता है। अश्लील दृश्यों, अश्लील गानों और अश्लील शब्दों का अमिट असर उस पर पड़ता है। इसका बुरा परिणाम निकलता है। वह पढ़ाई में अधिक रुचि नहीं लेता। वह कुसंग में पड़कर अपना जीवन बर्बाद करता है। वह अध्यापकों, माँ-बाप, और बड़े लोगों का अनादर करता है। उसमें कुभावनायें बस जाती हैं।

अनुशासन विद्यार्थी-जीवन को प्रगति के मार्ग में ले जाता है। अनुशासित लड़का अपने मन को अध्ययन में लगाता है। इससे उसका अध्ययन अच्छा होता है । वह परीक्षा में अच्छी सफलता प्राप्त करता है।

अनुशासन से दैनिक जीवन में व्यवस्था आ जाती है। इससे अनेक गुणों का विकास होता है । नियमित रूप से कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। कर्त्तव्य और अधिकार का समुचित ज्ञान होता है। परिवार में अनुशासित रहने से घर में शांति का वातावरण रहता है। यह अनुशासन भावी जीवन में भी उन्नति प्रदान करता है। इसलिए हर विद्यार्थी अनुशासित रहकर सफलता प्राप्त करे।

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Vidyarthi Aur Anushasan Nibandh ( 300 words )

नियमों का पालन करना और नियमबद्ध जीवन व्यतीत करना ही अनुशासन कहलाता है। जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन का बड़ा महत्त्व है। बिना अनुशासन के प्रगति असंभव है। विद्यार्थी जीवन में तो अनुशासन का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है। आज का विद्यार्थी कल का नेता, नागरिक, शिक्षक, डॉक्टर आदि होता है। विद्यार्थी काल ही उसके जीवन निर्माण की प्रयोगशाला होती है।

समय पर काम करना, विद्यालय जाना, खेल-कूद में भाग लेना और अपनी जीवनचर्या को नियमित रखना एक विद्यार्थी का परम कर्त्तव्य है। इसी में उसकी भलाई है। अध्यापकों, माता-पिता तथा अपने से बड़ों आदि की आज्ञा का पालन करना, विनयशील रहना, पढ़ाई में मन लगाना आदि भी उसके आवश्यक कर्त्तव्य हैं। ये सब तभी संभव हैं जब वह अनुशासन प्रिय हो तथा अनुशासन में रहने वाला हो। बिना अनुशासन के जीवन में कोई भी अच्छा कार्य नहीं किया जा सकता और न ही विद्या प्राप्त की जा सकती है। बिना शिक्षा के जीवन का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है।

जीवन में सफलता की एकमात्र कुंजी अनुशासन ही है। धरती पर जितने भी महान स्त्री-पुरुष हुए हैं, वे सब अपने कठोर अनुशासन के कारण ही प्रसिद्धि तक पहुँचे। अनुशासन के बिना न परिश्रम संभव है और न ही सफलता। अनुशासन का मूल मंत्र ही किसी विद्यार्थी को सफलता तथा श्रेय की बुलन्दियों तक पहुँचा सकता है। सही अर्थों में विद्यार्थी का अर्थ है विद्या को प्राप्त करने का इच्छुक और निरन्तर प्रयत्नशील रहना। लेकिन विद्या का अर्जन बिना अनुशासन के बगैर संभव नहीं। ज्ञान-प्राप्ति तो नियमों के कठोर पालन से ही हो सकती है। नियम, संयम व अनुशासन ही विद्यार्थी की धरोहर व पहचान है।

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Essay on Student and Discipline in Hindi ( 500 to 600 words )

विद्यार्थी का जीवन समाज व देश की अमूल्य निधि होता है। विद्यार्थी समाज की रीढ़ हैं क्योंकि वे ही आगे चल कर राज नेता बनते हैं। देश की बागडोर थाम कर राष्ट्र-निर्माता बनते हैं। समाज तथा देश की प्रगति इन्हीं पर निर्भर है। अतएव विद्यार्थी का जीवन पूर्णतः अनुशासित होना चाहिए। वे जितने अनुशासित बनेंगे उतना ही अच्छा समाज व देश बनेगा। 

विद्यार्थी जीवन को सुंदर बनाने के लिए अनुशासन का विशेष महत्त्व है। अनुशासन को जो लोग बंधन समझते हैं वे मूर्खता करते हैं। जिस प्रकार हमारे शरीर का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है और हमारी सब कर्मेंद्रियाँ अपना-अपना कार्य करती हैं। यदि कर्मेंद्रियां अपना-अपना कार्य करना बंद कर दें तो हमारा जीवन कठिन हो जाएगा। इसी भांति अनुशासित जीवन के अभाव में हमारा जीवन नष्ट-भ्रष्ट होकर गतिहीन और। दिशाहीन हो जाएगा।

अनुशासन का अर्थ

अनुशासन दो शब्दों से मिलकर बना है-अनु और शासन। अनु का अर्थ है पीछे और शासन का अर्थ है आज्ञा। अतः अनुशासन का अर्थ है-आज्ञा के पीछे-पीछे चलना। समाज और राष्ट्र की व्यवस्था और उन्नति के लिए जो नियम बनाए गए हैं उनका पालन करना ही अनुशासन है। अतः हम जो भी काय अनुशासनबद्ध होकर करेंगे तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी। अनुशासन के अंतर्गत उठना-बैठना, खाना-पीना, बोलना चालना, सीखना-सिखाना, आदर-सत्कार आदि सभी कार्य सम्मिलित हैं। इन सभी कार्यों में अनुशासन का महत्त्व है।

अनुशासन की शिक्षा

अनुशासन की शिक्षा स्कल की परिधि में ही संभव नहीं है। घर से लेकर स्कूल, खेल के मैदान, समाज के परकोटों तक में अनुशासन की शिक्षा ग्रहण की जा सकती है। अनुशासनप्रियता विद्यार्थी के जीवन को जगमगा देती है। विद्यार्थियों का कर्तव्य है कि उन्हें पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना चाहिए। एकाग्रचित होकर अध्ययन करना, बड़ों का आदर करना, छोटों से स्नेह करना ये सभी गुण अनुशासित छात्र के हैं। जो छात्र माता-पिता तथा गुरु की आज्ञा मानते हैं, वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करते हैं तथा उनका जीवन अच्छा बनता है। वे आत्मविश्वासी, स्वावलंबी तथा संयमी बनते हैं और जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम हो जाते हैं।

अनुशासन के प्रकार

अनुशासन में रहने वाले विद्यार्थी को अपने जीवन में कदम-कदम पर यश तथा सफलता मिलती है। उनका भविष्य उज्ज्वल हो जाता है। ऐसे ही छात्र राष्ट्र नेता बनते हैं और देश का संचालन करते हैं। विद्यार्थी का जीवन सुखी तथा संपन्न अनुशासनप्रियता से ही बनता है। अनुशासन भी दो प्रकार का होता है(i) आंतरिक, (ii) बाह्य । दूसरे प्रकार का अनुशासन परिवार तथा विद्यालयों में देखने को मिलता है। यह भय पर आधारित होता है। जब तक विद्यर्थी में भय बना रहता है तब तक नियमों का पालन करता है। भय समाप्त होते ही वह उदंड हो जाता है। भय से प्राप्त अनुशासन से बालक डरपोक हो जाता है।

आंतरिक अनुशासन श्रेष्ठ

आंतरिक अनुशासन ही सच्चा अनुशासन है। जो कुछ सत्य है, कल्याणकारक है, उसे स्वेच्छा से मानना ही आंतरिक अनुशासन कहा जाता है। आत्मानुशासित व्यक्ति अपने शरीर, बुद्धि, मन पर पूरापूरा नियंत्रण स्थापित कर लेता है। जो अपने पर नियंत्रण कर लेता है वह दुनिया पर नियंत्रण कर लेता है।

अनुशासनहीनता के घातक परिणाम

बड़े दुर्भाग्य की बात है कि छात्र-वर्ग अनुशासन के महत्त्व को भली-भांति नहीं समझ पाता है जिसका परिणाम यह होता है कि वह नित्य-प्रति स्कूल तथा कॉलेजों में तोड़-फोड़, परीक्षा में नकल करना, अध्यापकों को पीटना आदि कार्य करता है। तोड़-फोड़, लूट-पाट, आगजनी, पथराव आदि तो नित्य देखने को मिलते हैं। ऐसे छात्र न विद्या ग्रहण कर पाते हैं और न अपने संस्कारों को ही ठीक कर पाते हैं। वे समाज के लिए कलंक बन जाते हैं और समाज को सदैव दु:ख ही देते हैं। ऐसे छात्रों से न माता-पिता को सुख मिलता है और गुरुजनों को। वे देश के लिए भार बन जाते हैं।

अनुशासन से जीवन सुखमय तथा सुंदर बनता है। अनुशासनप्रिय व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य को सुगमता से प्राप्त कर लेते हैं। हमें चाहिए कि अनुशासन में रहकर अपने जीवन को सुखी, संपन्न एवं सुंदर बनाएं।

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इस लेख के माध्यम से हमने Vidyarthi Aur Anushasan Nibandh का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध 300, 100 शब्दों में
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