गुरु पूर्णिमा पर निबंध- Essay on Guru Purnima in Hindi Language

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गुरु पूर्णिमा पर निबंध- Essay on Guru Purnima in Hindi Language

भूमिका- भारत में सभी त्यौहार बड़ी धूम धाम से हर्ष और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। गुरू पुर्णिमा गुरूओं को समर्पित एक त्योहार है जिस दिन गुरूओं की पूजा अर्चना की जाती है। यह पर्व हर साल आषाढ़ माह की पुर्णिमा को मनाया जाता है। गुरु पुर्णिमा को व्यास पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन महाभारत के रचियता वेद व्यास जी का जन्मदिन होता है। गुरू पुर्णिमा वर्षा रितु के प्रारंभ में आता है।

विशेषता- गुरू पुर्णिमा का दिन गुरूओं को अर्पित किया जाता है। गुरू का हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। गुरू वह होता है जो हमें अग्यान रूपी अंधकार से ग्यान रूपी प्रकाश की तरफ लेकर जाता है। इस दिन लोग गुरूओं के आश्रम जाते हैं और उन्हें अलग अलग तरह से सम्मानित करते हैं। बहुत से स्थानों पर इस दिन गुरूओं के नाम पर भंडारा कराया जाता है। प्राचीन काल में जब गुरू शिष्य होते थे तो गुरू पुर्णिमा के दिन ही शिष्य उन्हें सम्मान सहित गुरू दक्षिणा देते थे।

उचित समय- गुरू पुर्णिमा को सीखने का उचित समय कहा गया है क्योंकि इस समय न ही ज्यादा गर्मी होती है और न ही ज्यादा सर्दी। इसलिए इस समय सभी विद्यार्थी अच्छे से पढ़ सकते हैं और गुरूओं से कुछ नया सीख सकते है। गुरू पुर्णिमा के समय सभी साधु संत किसी भी पवित्र स्थान पर जाकर चार महीने के लिए रहते हैं और तप करते हैं। गुरूओं के माध्यम से ही कोई भी व्यक्ति भगवान को प्राप्त कर सकता है। गुरू हमारे मार्गदर्शक होते हैं जो हमें सही मार्ग दिखाते हैं।

निष्कर्ष– गुरू हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाते है और हर व्यक्ति का कोई न कोई गुरू होता है। हमें गुरूओं का सम्मान करना चाहिए और उनकी भक्ति ही भगवान की भक्ति है। गुरू पुर्णिमा के दिन गुरू की पुजा करने से उनकी दीक्षा का दस गुणा फल हमें मिलता है। गुरू पुर्णिमा हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है और इस दिन बहुत सारे लोग तीर्थ स्थलों पर जाते हैं और साधु संतो की पूजा करते हैं। गुरू पुर्णिमा पर सारा वातावरण भक्ति भाव से भर जाता है और लोगों के मन को पवित्र कर जाता है। हमें भी अपने गुरूओं का सम्मान करना चाहिए और उनकी आग्या का पालन करना चाहिए। गुरूओं के दिखाए मार्ग से ही हम अपनी मंजिल प्राप्त कर सकते हैं। गुरू देवता के समान है और गुरू पुर्णिमा का दिन उन्हें समर्पित है।

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