Kusangati Essay in Hindi- कुसंगति के दुष्परिणाम पर निबंध

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Kusangati Essay in Hindi- कुसंगति के दुष्परिणाम पर निबंध

कुसंगति का शाब्दिक अर्थ है- बुरी संगति। अच्छे व्यक्तियों की संगति से बुद्धि की जड़ता दूर होती है, वाणी तथा आचरण में सच्चाई आती है, पापों का नाश होता है और चित निर्मल होता है लेकिन कुसंगति मनुष्य में बुराइयों को उत्पन्न करती है। यह मनुष्य को कुमार्ग पर ले जाती है। जो कुछ भी सत्संगति के विपरीत है, वह कुसंगति सिखलाती है। एक कवि ने कहा भी है

काजल की कोठरी में कैसे हू सयानो जाय,

एक लीक काजल की लागि हैं, पै लागि हैं ।

यह कभी नहीं हो सकता कि परिस्थितियों का प्रभाव हम पर न पड़े। दुष्ट और दुराचारी व्यक्ति के साथ रहने से सज्जन व्यक्ति का चित्त भी दूषित हो जाता है।

कुसंगति का बड़ा प्रभाव पड़ता है। एक कहावत है-अच्छाई चले एक कोस, बुराई चले दस कोस । अच्छी बातें सीखने में समय लगता है। जो जैसे व्यक्तियों के साथ बैठेगा, वह वैसा ही बन जाएगा। बुरे लोगों के साथ उठने-बैठने से अच्छे लोग भी बुरे बन जाते है। यदि हमें किसी व्यक्ति के चरित्र का पता लगाना हो तो पहले हम उसके साथियों से बातचीत करते है। उनके आचरण और व्यवहार से ही उस व्यक्ति के चरित्र का सही ज्ञान हो जाता है।

कुसंगति की अनेक हानियाँ हैं। दोष और गुण सभी संसर्ग से उत्पन्न होते हैं। मनुष्य में जितना दुराचार, पापाचार, दुश्चरित्रता और दुव्यसन होते हैं, वे सभी कुसंगति के फलस्वरूप होते हैं। श्रेष्ठ विद्यार्थियों को कुसंगति के प्रभाव से बिगड़ते हुए देखा जा सकता है। जो विद्यार्थी कभी कक्षा में प्रथम आते थे, वही नीच लोगों की संगति पाकर बरबाद हो जाते हैं। कुसंगति के कारण बड़े-बड़े घराने नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं। बुद्धिमान्-से-बुद्धिमान् व्यक्ति पर भी कुसंगति का प्रभाव पड़ता है। कवि रहीम ने भी एक स्थल पर लिखा है

बसि कुसंग चाहत कुसल, यह रहीम जिय सोच।

महिमा घटी समुद्र की, रावन बस्यौ पड़ोस ॥

सज्जन और दुर्जन का संग हमेशा अनुचित है बल्कि यह विषमता को ही जन्म देता है। बुरा व्यक्ति तो बुराई छोड़ नहीं सकता, अच्छा व्यक्ति ज़रूर बुराई ग्रहण कर लेता है। अन्यत्र रहीम कवि लिखते हैं-

कह रहीम कैसे निभै, बेर केर को संग।

वे डोलत रस आपने, उनके फाटत अंग ॥

अर्थात् बेरी और केले की संगति कैसे निभ सकती है ? बेरी तो अपनी मस्ती में झूमती है लेकिन केले के पौधे के अंग कट जाते हैं। बेरी में काँटे होते हैं और केले के पौधे में कोमलता। अत: दुर्जन व्यक्ति का साथ सज्जन के लिए हानिकारक ही होता है।

हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं तो हमें दुर्जनों की संगति छोड़कर सत्संगति करनी होगी। सत्संगति का अर्थ है-श्रेष्ठ पुरुषों की संगति। मनुष्य जब अपने से अधिक बुद्धिमानू, विद्वान् और गुणवान लोगों के संपर्क में आता है तो उसमें अच्छे गुणों का उदय होता है। उसके दुर्गुण नष्ट हो जाते हैं। सत्संगति से मनुष्य की बुराइयाँ दूर होती हैं और मन पावन हो जाता है। कबीरदास ने भी लिखा है- 

कबीरा संगति साधु की, हरे और की व्याधि।

संगति बुरी असाधु की, आठों पहर उपाधि।

सत्संगति दो प्रकार से हो सकती है। पहले तो आदमी श्रेष्ठ, सज्जन और गुणवान व्यक्तियों के साथ रहकर उनसे शिक्षा ग्रहण करे। दूसरे प्रकार का सत्संग हमें श्रेष्ठ पुस्तकों के अध्ययन से प्राप्त होता है। सत्संगति से मनुष्यों की ज्ञान-वृद्धि होती है। संस्कृत में भी कहा गया है- सत्संगति : कथय कि न करोति पुसामू। रहीम ने पुनः एक स्थान पर कहा है

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग ।

चंदन विषा व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ॥

अर्थात् यदि आदमी उत्तम स्वभाव का हो तो कुसंगति उस पर प्रभाव नहीं डाल सकती। यद्यपि चंदन के पेड़ के चारों ओर साँप लिपटे रहते हैं तथापि उसमें विष व्याप्त नहीं होता। महाकवि सूरदास ने भी कुसंगति से बचने की प्रेरणा देते हुए कहा है

तज मन हरि-विमुखनि को संग ।

जाकै संग कुबुधि उपजति है, परत भजन में भंग ॥

बुरा व्यक्ति विद्वान् होकर भी उसी प्रकार दुखदायी है, जिस प्रकार मणिधारी साँप । मनुष्य बुरी संगति से ही बुरी आदते सीखता है। विद्यार्थियों को तो बुरी संगति से विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। सिगरेट-बीड़ी, शराब, जुआ आदि बुरी आदते व्यक्ति कुसंगति से ही सीखता है। अस्तु, कुसंगति से बचने में ही मनुष्य की भलाई है।

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1 thought on “Kusangati Essay in Hindi- कुसंगति के दुष्परिणाम पर निबंध”

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    धन्यवाद !!!

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