एकता पर निबंध- Essay on Unity in Hindi

In this article, we are providing an Essay on Unity in Hindi एकता पर निबंध | Nibandh। Essay in 200, 300, 500 words For Class 7,8,9,10,11,12 Students. Speech on Unity & Ekta par nibandh

एकता पर निबंध- Essay on Unity in Hindi

Ekta Par Nibandh ( 700 words )

एकता का अर्थ एक साथ रहना होता है एकता से तात्पर्य उस अभिव्यक्ति से हैं, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में एक दूसरे की मदद करने को हमें प्रेरित करती हैं। एकजुट रहना मजबूत रिश्ते और मजबूत समाज के निर्माण में एकता विशेष महत्व रखता है भारत देश में एकता से रहने को लेकर काफी बल दिया जाता है।

एकता एक ऐसी भावना है जो अगर प्रत्येक व्यक्ति के मन में समाहित हो तो समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे की सहायता के लिए हर समय तत्पर रहेगा और हर व्यक्ति का समर्थन भी करेगा। 

भारत में राष्ट्रीय एकता?

भारत एक विविध संस्कृतियों और धर्मो वाला देश है। हमारे देश में विभिन्न धर्म के लोग एक साथ एक समाज में रहते हैं। जहां पर आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाया जाता है कि वह एक साथ एक ही समाज में रहे और एकजुटता के साथ अपना जीवन व्यतीत करें।

राष्ट्रीय एकता किसी भी देश के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण भावना होती है जो उस देश के प्रत्येक व्यक्ति को उस देश से प्रेम भाव रखने के लिए प्रेरित करती है। 

एकता की भावना का महत्व?

किसी भी राष्ट्र के व्यक्ति के हृदय में राष्ट्रीय एकता की भावना का होना उसके राष्ट्र को और भी सशक्त बनाता है और प्रत्येक राष्ट्र यह चाहता है कि उसके राष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र से प्रेम हो और अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना भी हो।

राष्ट्रीय एकता देश को मजबूत और सभी देशों से भिन्न राष्ट्र बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एकता की भावना एक ऐसी भावना है जो बिना किसी वर्ग और जाति की परवाह किए बिना लोगों को एकजुट होकर रहने के लिए प्रेरित करती हैं।

भारत देश मे एक नहीं बल्कि अनेक भाषाएं बोली जाती हैं इसलिए भारत देश को अनेकता में एकता की मिसाल भी कहा जाता है। आज भी कई बार यह देखा जाता है कि जैसे जैसे समय परिवर्तित हो रहा है वैसे-वैसे लोगों के बीच आज एकता की कमी देखी जा रही है। 

एकता में कमी का कारण?

जब समाज के व्यक्ति स्वार्थी हो जाते हैं और वह अपना ही सोचने लगते हैं तब एकता में कमी आना प्रारंभ हो जाता है जो समाज और देश के हित में नहीं है। समाज के व्यक्तियों में जब स्वार्थ की भावना आती है और उनकी विचारधारा संकीर्ण हो जाती है तब स्वहित से प्रेरित होकर एकता से दूर होते चले जाते हैं और उनमे बात बात में संघर्ष की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। 

हमारा देश एक विशाल क्षेत्रफल वाला देश है जिसमें अनेक तरह की विभिन्न दृष्टिगोचर होती हैं। लोगों में बोलने की खानपान की आदतों की रहन-सहन ,आचार – व्यवहार आदि की विभिन्नताएं विशेष रूप से देखी जा सकती हैं। यहां तक की मानवीय शारीरिक गठन में भी अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है इतनी समय विभिन्नताएं होते हुए भी हमारे देश के सभी नागरिक एकता के सूत्र में बंधे हुए रहते हैं। 

एकता का स्वरूप

यह एकता बाहर से लाई हुई कोई चीज नहीं है इसके विपरीत यह एकता हमारी पीढ़ियों की विचारधारा मे सदियों से समाई हुई है। हमारी इस एकता का मूल हमारी सहनशक्ति में विद्यमान है। हम सभी आपस में कितना भी विरोध हो फिर भी उस विरोध को भूल कर या उससे अलग हटकर व्यवहार करने में सक्षम होते हैं। यह हमारी सहनशक्ति के द्वारा ही संभव है।

हमारे देश में एकता के अनेक रूप देखे जा सकते हैं जिनमें धार्मिक एकता, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकता सर्वोपरि है। आपस मे मिल जुल कर रहने की भावना के कारण ही सभी तरह की एकता संभव है। 

यह हमारी विचारधारा में स्वयं ही समाहित है। आज के समय में कुछ अराजक तत्व इस भावना को छिन्न-भिन्न करना चाहते हैं ताकि हमारे देश की एकता और अखंडता को समाप्त किया जा सके। फिर भी हम सब मिलकर के रहने में अटूट विश्वास रखते हैं इस विश्वास के द्वारा ही हम समस्त तरह के अराजक आघातों को  चकनाचूर कर देते हैं।

उपसंहार

हमारे समाज पर अनेक तरह के दवाव बनाए जा रहे हैं ताकि हमारी राष्ट्रीय समरसता और एकता को कमजोर किया जा सके इस कार्य में हमारे पड़ोसी देश सक्रिय हैं। अनेक तरह की राजनीतिक प्रतिद्वंदीताएँ हमारे समाज की एकता को कमजोर करने का कार्य कर रही हैं लेकिन हमारे विरोधी चाह कर भी हमारी एकता को समाप्त नहीं कर सकते हैं।

Unity in Diversity Essay in Hindi

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