Essay on Morning Walk in Hindi- प्रातःकाल की सैर पर निबंध

In this article, we are providing Essay on Morning Walk in Hindi | Pratahkal ki Sair Essay in Hindi. प्रातःकाल की सैर पर निबंध- सैर का अर्थ, प्रातः काल का दृश्य, प्रातःकाल सैर से लाभ Benefits of morning walk in Hindi

Essay on Morning Walk in Hindi- प्रातःकाल की सैर पर निबंध

भूमिका- ‘शरीरमाद्यम् खलु धर्म साधनम्’ के अनुसार शरीर जीवन के सभी व्यापारों-व्यवहारों का हेतू है। आध्यात्मिक चिंतन हो अथवा शरीरिक कार्य हो, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन सब का मूलाधार शरीर है। शक्ति सम्पन्न शरीर, दिव्य ललाट, विशाल-वक्ष स्थल, बलशाली भुजाएं भव्य एवं आकर्षक व्यक्तित्व के लक्षण हैं। शरीर की आरोग्यता और पुष्टता ही स्वस्थ मन और मस्तिष्क की आधारशिला है। मानव-जीवन सुख और शान्ति की कामना में निरत है। अत: भौतिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए नीरोगशरीर आवश्यक है। इस प्रकार प्रत्येक व्यवसायी श्रमिक हो अथवा पूंजीपति, विद्यार्थी हो अथवा अध्यापक, डाक्टर हो अथवा इंजीनियर, अपने-अपने कार्य को निपुणता से तभी कर सकते हैं जब निरोग शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क भी हो।

पुष्ट और निरोग शरीर के लिए जहां संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है वहाँ शारीरिक श्रम भी अनिवार्य है। शारीरिक श्रम अनेक क्रियाओं द्वारा होता है। यथा-योगासन, व्यायाम, प्राणायाम आदि-आदि। प्रात:कालीन प्रमण भी इसी प्रकार का साधन है जिससे शरीर स्वस्थ और शक्ति-सम्पन्न रहता है।

सैर का अर्थ- प्रातः काल सैर का शाब्दिक अर्थ है–प्रातः काल के समय में घूमना। प्रातः काल का भाव सूर्योदय से पूर्व है। ऊषा के आगमन पर, रात्रि के अन्धकार के विलीन होते ही शैय्या को त्यागना तथा सुविधानुसार शौचादि से निवृत्त होकर धूल से रहित पेड़ पौधों से युक्त जहां दूषण रहित वायु हो, ऐसे स्थल में परिभ्रमण सुखदायक होता है। प्रात:काल के भ्रमण में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जहां वायु स्वच्छ न हो वहां घूमना ही लाभकारी होता है। विशेष ऋतुओं में प्रात:काल के प्रमण में स्त्र धारण करना हितकर होता है। जाड़े की ऋतु में शरीर पर भलीभान्ति ऊनी वस्त्र कर भ्रमण के लिए जाना चाहिए जबकि ग्रीष्म ऋतु में मोटे वस्त्र पहनना हितकारी नहीं ता है। वर्षा ऋतु में वर्षा से बचना आवश्यक होता है।

प्रातः काल का दृश्य- प्रभात में पौ फूटते ही शीतल मन्द सुगन्धित वायु बहती है। अपने-अपने नीड़ों को त्यागकर विहग मधुर कलरव कर मानो ऊषा-सुन्दरी का स्वागत करते हों। कमल की कारा से निकल कर भ्रमर गुन-गुन कर उड़ने लगते हैं। वन-उपवन में पराग-भरे पुष्प खिल-खिलाते हुए प्रतीत होते हैं। वायु वृक्षों में अठखेलियां कर लाज भरी कलिकाओं का पूंघट उठाकर उन का मुख झांकती है। शस्य श्यामला धरती पर बिखरी ओस की बूंदे मोतियों के समान चमकती हैं। प्रकृति के मनमोहक दृश्यों को देखकर मन रूपी मोर भी नाच उठता है। प्रभात के इन नयनाभिराम दृश्यों को देख कर उस सर्वशक्तिमान ईश्वर की स्मृति हो जाती है जिसने इस सम्पूर्ण सुन्दर प्रकृति का निर्माण किया है। कवि के शब्दों में-

जब बहुत सवेरे चिड़ियां जग कर

कुछ गीत खुशी के गाती है।

हे जग के सृजनहार प्रभो,

तब याद तुम्हारी आती है।

जब पूर्व दिशा से सूर्य के आगमन की सूचना सुनहला प्रकाश देता है तो धरती अत्यन्त सुन्दर लगने लगती है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त प्रातः काल के सुहावने दृश्य का वर्णन इस प्रकार करते हैं-

इसी समय पौ फटी पूर्व में, पलटा प्रकृति परी का रंग।

किरण कण्टकों से श्यामाम्बर फटा, दिवा के दमके अंग 

कुछ-कुछ अरुण सुनहरी, कुछ कुछ प्राची की अब भूषा थी,

पंचवटी की कुटी खोलकर, खड़ी स्वयं अब ऊषा थी

प्रातःकाल भ्रमण/सैर से लाभ ( Benefits of morning walk in Hindi )- प्रात:काल भ्रमण करने से अनेक लाभ होते हैं। इससे सबसे बड़ा और सबसे पहला लाभ यही होता है कि प्रात:काल देर तक बिस्तर पर सोने की अपेक्षा जल्दी जागना पड़ता है और इस प्रकार सुस्ती को त्याग कर मनुष्य चुस्त हो जाता है। प्रातः काले शीघ्र उठने से शरीर में स्फति रहती है इससे मन भी प्रसन्न रहता है और न प्रकार सन्ध्या तक सारे दिन का समय ही प्रसन्नता से व्यतीत होता है। मन के मलिन विचार दूर होते है। प्रात:काल भ्रमण करने से शरीर में रक्त का संचार तीव्र गति से होता है। इससे शरीर पर तेज़ आता है।जंल्दी-जल्दी चलने से अंग-प्रत्यंग गति करते हैं। ठण्डी-ठण्डी हवा के सेवन से मुख-मण्डल चमकने लगता है। प्रात:काल के भ्रमण से पाचन। शक्ति बढ़ती है, हृदय तथा फेफड़ों की गति सामान्य ढंग से कार्य करती है और उन्हें बल मिलता है। शुद्ध हवा जब नाक के मार्ग से शरीर में प्रवेश करती है तो रक्त भी शुद्ध होता है। इससे शरीर आरोग्य रहता है। प्रात:काल भ्रमण करने से मनुष्य का मानसिक विकास भी होता है उसकी बुद्धि विकसित होती है और उसमें अच्छे भावों की वृद्धि होती है। जब नंगे पांव सुबह समय हरी घास भर घूमते हैं तो मनुष्य के मस्तिष्क में ताजगी आती है और अनेक विकार भी दूर हो जाते हैं। इससे बुद्धि बढ़ती है तथा संकल्प शक्ति भी विकसित होती है और व्यक्ति दीर्घजीवी होता है।

प्रात:काल के सैर/भ्रमण के लिए मनुष्य को कुछ व्यय नहीं करना पड़ता है। अत: सभी वर्गों के लिए यह हितकर है। वृद्धावस्था में व्यायाम करना सम्भव नहीं होता है अत: प्रात:काल का भ्रमण विशेष उपयोगी माना जाता है। इसी प्रकार जो लोग केवल बैठकर दिन भर कार्य करते हैं, जिनका आना जाना केवल वाहनों में होता है उनके लिए तो प्रात:काल का भ्रमण अत्यंत ही आवश्यक है। ऑफिस में काम करने वाले लोग डॉक्टर, दर्जी, अध्यापक आदि के लिए प्रात:काल का भ्रमण/सैर उपयोगी होता है।

उपसंहार- शरीर का आरोग्य होना सभी के लिए आवश्यक होता है। रोगी शरीर मनुष्य के लिए बोझ बन जाता है तथा कभी-कभी तो जीवन व्यतीत करना अत्यंत कठिन हो जाता है। अत: जीवन को सुखमय बनाने के लिए, दीर्घजीवी बनाने के लिए अधिक परिश्रम करने के लिए। तथा शक्ति संचय के लिए प्रात:काल का सैर अधिक उपयोगी एवं व्यय-रहित होता है।

 

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