Essay on Child Labour in Hindi- बाल मजदूरी पर निबंध (बाल श्रम)

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Essay on Child Labour in Hindi- बाल मजदूरी पर निबंध (बाल श्रम)

Essay on Child Labour in India in Hindi ( 150 words )

बाल श्रमिक का अर्थ है- किसी बच्चे का बचपन में ही मजदूर हो जाना। बच्चे कोमल होते हैं। पढ़ना-लिखना और निश्चित खेलना उनका मौलिक अधिकार है। बचपन में उनके कंधों पर कमाई-धमाई का बोझ नहीं डालना चाहिए। ऐसा करना उनके मौलिक अधिकार पर ही कठाराघात है। भारत एक गरीब देश है। यहाँ के निवासियों में से अनेक अभागे लोग दो समय का भोजन भी नहीं जुटा पाते। इस स्थिति में बच्चों के माँ-बाप उन्हें पैदा होते ही कमाने के लिए देते हैं। यह समस्या बहुत कठिन है। यह तब तक दूर नहीं हो सकती, जब तक कि देश से गरीबी और भुखमरी दूर नहीं होती। बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना, बचपन में शिक्षा को अनिवार्य बनाना, इसके लिए देश की मानसिकता तैयार करना तथा बाल-श्रमिकों पर सख्त कदम उठाना ही कुछ कारगर उपाय हो सकते हैं।

Child Labour Essay in Hindi ( 200 words )

बाल मजदुरी आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है जिसके कारण देश का भविष्य अंधकार में हैं। बाल मजदुरी का अर्थ बच्चों से 14 साल से कम उम्र में काम करवाना है। हम बहुत सी दुकानों, सड़को, कारखानों और डाब्बों में बच्चों को काम करते हुए दिखते हैं जो कि गलत है। बाल मजदुरी के कारण बच्चों से उनका बचपन छीन जाता है। उनका सही रूप से शारूरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता है। उन्हें बहुत से अत्याचार और यातनाओं का सामना करना पड़ता है। कारखानों की विष युक्त वातावरण में काम करने को कारण वह बीमार पढ़ जाते हैं और उनकी कम उमर में ही मृत्यु हो जाती है।

हर देश का भविष्य वहाँ के बच्चे होतें हैं और यदि वहीं स्वस्थ नहीं होगा और उनका पूर्ण विकास नहीं होगा तो देश प्रगति नहीं कर सकेगा। बाल मजदुरी को रोक हर बच्चे को उसका हक दिलाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सरकार ने कानुन बनाया है कि किसी भी कार्यस्थल पर 14 साल की उमर से छोटे बच्चे को नहीं रखा जाऐगा। यदि कोई ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसे सख्त से सख्त सजा दी जाऐगी। अगर हम भी व्यक्तिगत स्तर पर किसी बच्चे को बाल मजदुरी की समस्या से पीड़ित पातो हैं तो हमें उसकी सहायता करनी चाहिए और उन्हें उनका उज्जवल भविष्य देना चाहिए।

Bal Majduri Essay in Hindi in 300 words

5 से 14 साल के बच्चों के द्वारा नियमित तौर पर काम करवाना बाल मजदूरी कहलाता है। बाल मजदूरी एक गैर कानूनी कार्य है जो उनके माता-पिता या उनके मालिक के द्वारा दबाव में करवाया जाता है। विकसित देशों में बच्चों को निम्न दरों पर घोर परिश्रम करवाया जाता है । बाल मजदूरी के कारण बच्चे अपना बचपन सही तरह से नहीं जी पाते हैं और इसका परिणाम उनके भविष्य पर पड़ता है । भारत के संविधान अनुसार सभी बच्चों को अपना बचपन जीने का अधिकार है। और इस अधिकार को कोई भी नहीं छीन सकता। अगर कोई उनका यह अधिकार छीनता है तो वह भारत के संविधान के खिलाफ होगा और उन पर कार्यवाही होगी। लेकिन 2011 के सेंसस के अनुसार भारत में कुल 1 करोड़ बच्चो से बाल मजदूरी करवाई जाती है। जो किसी भी विकसित या विकासशील देशों के लिए बहुत हानिकारक है।

बाल मजदूरी इन दिनों सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है और इसको हल करने के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है। लेकिन यह दुश कार्य खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसका प्रभाव हमारे हमारे देश के भविष्य पे पड़ेगा ।

बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी और शिक्षण संस्थान की कमी है । बच्चों को गरीबी के अभाव में जीवन जीने के लिए बाल मजदूरी करनी पड़ती है तथा अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाई लिखाई की जगह कृषि कार्यों में लगा दिया जाता है। जिससे उनकी पढ़ाई को काफी नुकसान होता है।

हम सब मिलकर इस बाल मजदूरी को रोक सकते है। यदि सरकार, ग्रामीण तथा अन्य विकसित क्षेत्रों में शिक्षण संस्थान को बढ़ावा दें तो बच्चे पढ़ सकेंगे और अपना भविष्य बना सकेंगे। और धीरे-धीरे बाल मजदूरी कम होती जाएगी और एक समय ऐसा आएगा कि बाल मजदूरी इस देश से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से समाप्त हो जाएगी।

Bal Shram Par Nibandh ( बाल श्रम पर निबंध 800 words)

बाल मजदूरी मानवता और समाज दोनों के लिए ही अभिशाप है बचपन किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे यादगार भाग होता है जब भगवान ने ही इसे इतना खूबसूरत बनाया है तो हमारा क्या अधिकार है की हम इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड-छाड़ करें एक अच्छा बचपन तो हर किसी का मौलिक अधिकार है हर बच्चे को ये अधिकार तो होना ही चाहिए कि बचपन में वह दूसरे बच्चों के साथ खेल सके, स्कूल में शिक्षा ले सके, प्रकृति की सुन्दरता और अपने माँ-बाप के प्रेम का अनुभव कर सके

यह सब समझते और जानते हुए भी समाज का एक वर्ग अपने तुच्छ स्वार्थ और सोच की वजह से कुछ बच्चों का जीवन जहन्नुम बना देते हैं उन्हें बाल मजदूर बना के उन से हर तरीके का मानवीय और अमानवीय कार्य कराते हैं और उनका बचपन हमेशा के लिए रौंद देते हैं

बाल मजदूरी को हम दो हिस्सों में बाँट सकते हैं माता-पिता द्वारा कराई गयी मजदूरी और दूसरा समाज और अन्य लोगों कराई गयी मजदूरी माँ-बाप द्वारा कराई गयी मजदूरी का ज़िक्र बड़े स्तर पर नहीं होता जब माँ-बाप 5 से 14 साल की बच्चे पर परिवार की ज़िम्मेदारी के रूप में उन से बहुत से काम कराने लगते हैं, तो ये भी एक बाल-मजदूरी ही है ऐसे माँ-बाप उन्हें बचपन में ही इतना बड़ा कर देते हैं की अपने जीने के सारे साधन उन्हें बचपन से ही जुटाने पड़ते हैं। जब कोई और बच्चे के प्रति कठोर होता है तो बच्चा फिर भी अपने मन को समझा लेता है, पर जब अपने ही लोग ऐसा व्यवहार करते है तो बच्चे के मानस पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है बहुत दूर से पानी भर के लाना, रस्सियों पर नाच करवाना, सर्कस में काम करवाना, घर के साफ़-सफाई, खाना बनाने आदि का काम करवाना, खेत में काम करवाना, ये सब इसी वर्ग में आते हैं

दूसरे तरह की बाल-मजदूरी समाज द्वारा कराई जाती है अनाथ बच्चों या गरीब बच्चों को कुछ व्यापारी लोग अपने स्वार्थ के लिए काम पर रख लेते हैं और फिर उन से तरह-तरह के काम करवाते हैं जैसे चूड़ी और कांच बनाना, कूड़ा करकट साफ़ कराना, दुकान के सब काम कराना आदी किस-किस तरह के वीभत्स और शारीरिक व्याधि उत्पन्न करने वाले कार्य इन बच्चों से कराये जाते हैं इसकी फ़ेहरिस्त बहुत लम्बी है

भारत में बाल-मजदूर की दशा बहुत ही दयनीय है और इसका त्वरित समाधान बहुत आवश्यक है भारत ही नहीं, ज़्यादातर विकसित देशों में बाल-मजदूरों की संख्या बहुत ज्यादा है ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां पर विस्तृत स्तर पर गरीबी, भुखमरी तथा शिक्षा और स्कूली शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी है हालांकि, आज़ादी के बाद से देश में बाल-मजदूरी को कम करने के लिए बहुत से नियम और क़ानून बनाए गए हैं परन्तु अभी तक वह सब अपने उद्देश्य तक नहीं पहुँच पाए है

सिर्फ नीतियाँ और कानून बाल- मजदूरी के अभिशाप को हटाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं हमें खुद भी जागरूक होना होगा और इस जागरूकता को और भी फैलाना होगा बाल मजदूरी रोकने के उपाय ( Solution of Child Labour in Hindi ), जैसे –

1. कुछ ऐसे संगठन बनाएं जो बाल-मजदूरी को रोकने के लिए प्रयासरत रहे
2. लोगों में और खासतौर से माँ-बाप में इस बात की जागरूकता बाधाएं की कैसे बचपन में बच्चों की शिक्षा जरूरी और अनिवार्य है
3. समाज में बाल-मजदूरी से होने वाले दुशप्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ायें और इसके रोकथाम के उपाय उन्हें बताएं
4. प्रारम्भिक शिक्षा को हर स्तर पर मुफ्त करें ताकि गरीब से गरीब बच्चा शिक्षा पा सके
5. लोगों को छोटा परिवार रखने के लिए प्रेरित करें
6. सरकारी योजनाओं का लाभ हर किसी को मिले ये सुनिश्चित करें
7. जो भी लोग बाल-मजदूरी को बढ़ावा दें उन्हें कठोर रूप से दण्डित कर समाज में ये सन्देश दें की ये एक बहुत बड़ा अक्षम्य अपराध है
8. देश में रोजगार के अधिक से अधिक अवसरों का सृजन करें

सार: बाल-मजदूरी एक दंडनीय अपराध है इसे किसी भी प्रकार से बढ़ावा ना दें बच्चे प्रकृति की अद्भुत और अनमोल देन हैं, इनके बचपन से ना खेलें क्या कोई भी देश, शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों के साथ तरक्की कर सकता है? स्वयं विचार कीजिए और अपने देश को बचाइये

# Baal Mazdoori Par Nibandh

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