वायु प्रदूषण पर निबंध- Essay on Air Pollution in Hindi

Here we are providing an Essay on Air Pollution in Hindi- ( Vayu Pradushan ) वायु प्रदूषण पर निबंध. What is Air Pollution in Hindi. वायु प्रदूषण की समस्या और उसको को रोकने के उपाय की पूरी जानकारी है। Air Pollution Essay in 150, 200, 300, 500, 1000 words For Class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 Students.

वायु प्रदूषण पर निबंध- Essay on Air Pollution in Hindi

Air Pollution Essay in Hindi 300 words

वायु प्रदूषण आज दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है, यदि आज वायु प्रदूषण पर नियंत्रण न रखा गया तो आगे के भविष्य में हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और वायु प्रदूषण से आज सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि प्रतिदिन लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता जा रहा है और मैं आपको इसी गंभीर विषय के बारे में बहुत ही सरल भाषा में समझाने वाला हूं कि वायु प्रदूषण क्या है और वायु प्रदूषण किस तरह होता है ? और इस वायु प्रदूषण को किस तरह से रोका जा सकता है ?

वायु प्रदूषण क्या है?

सबसे पहले आपको यह जान लेना जरूरी है कि वायु प्रदूषण क्या है ? वायु प्रदूषण का अर्थ : वायु में विभिन्न गैसों कि उपरोक्त्त मात्रा उसे संतुलित रखती है, अगर इसमें थोड़ा सा भी अन्तर आ जाता है तो यह असंतुलित हो जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होती है ‌। हमें श्वसन के लिए ऑक्सीजन जरूरी है और जब कभी वायु कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन में ‌ ऑक्साइडो कि वृद्धि हो जाती है, तो ऐसी वायु को प्रदूषित वायु या फिर हम इसे “ वायु प्रदूषण ” भी कह सकते हैं ।

अभी आपने यह तो जान लिया कि air pollution क्या होता है और अब हम जानते हैं कि इस वायु प्रदूषण को किस तरह से रोका जा सकता है । वायु प्रदूषण को किस तरह से नियंत्रण में लाया जा सकता है उसके कुछ उपाय बताता हूं :

1. सबसे पहले हमें वाहनों में ईंधन से निकलने वाले धुएँ पर नियंत्रण रखना पड़ेगा ।

2. उसके बाद धुआँ रहित चूल्हे व सौर ऊर्जा को हमें प्रोत्साहन करना पड़ेगा

3. वनों की अनियंत्रित कटाई को हमें रोक लगानी होगी और इसके साथ हमें वृक्षारोपण कार्यक्रम को भी प्रोत्साहित करना है ।

यदि हमने इन तीनों उपायों को सही ढंग से किया तो कि एक दिन जरूर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण ला पाएंगे ।

 

Vayu Pradushan Nibandh par Nibandh 500 words

भूमिका–  वायु का दुषित होना ही वायु प्रदुषण है। दुषित हवा हमारे संपूर्ण वातावरण में फैली हुई है और हम उसी हवा में सास लेते है। प्रदुषित वातावरण मनुष्य के साथ-साथ पशुपक्शियों यहाँ तक कि पेड़पौधों को भी नुकसान पहुँचाता है। पर्यायवरण में निरंतर बढ़ रही रसायनों की संख्या वायु को दुषित कर रही है और ओजोन परत में भी छेद कर रही है।

वायु प्रदुषण के कारण– हवा के दुषित होने का कारण मनुष्य और उसकी गतिविधियाँ है। तरक्की की होड़ में मनुष्य अपने वातावरण को हानि पहुँचाता जा रहा है। मनुष्य खुद के स्वास्थ का दुश्मन खुद ही बनता जा रहा है। मनुष्य द्वारा वायु के प्रदुषित होने के निम्नलिखित कारण है-

1. वाहन-  सड़को पर दौड़ रही कारों, बसों, मोटर साइकिल से निकलने वाले धुएँ से भी वायु दुषित होती है।
2. उघोग- बढ़े बढ़े उघोगों से निकलने वाले धुएँ से जिसमें बहुत से रसायन होते है हवा के दुषित होने का एक मुख्य कारण है ।
3. फसल अवशेष- फसल के बाद बचे हुए अवशेष जलाने से भी वायु प्रदुषण होता है।
4. बम पटाखे- दीवाली में और शादियों में जलाए जाने वाले बम पटाखों से भी हवा दुषित होती है।

वायु प्रदुषण के परभाव– दुषित वायु जिसमें हम सास लेते है हमारे स्वास्थ पर बहुत बुरा असर डालती हैं। इसके अलग अलग चीजों पर होने वाले परभाव निम्नलिखित है-

1. दुषित हवा के कारण सभी जीवों को सास लेने में बहुत तकलीफ होती है और फेफड़ो संबंधित बिमारी भी उत्पन्न होती है।
2. इसकी वजह से ओजोन परत में छेद होता है जिसके कारण हानिकारक कॉस्मिक किरणें हमारे शरीर पर पड़ती है और त्वचा कैंसर जैसी गंभीर बिमारी को जन्म देती है।
3. हवा में मौजुद रसायन वातावरण के तापमान को भी बढ़ाते है जिससे गर्मी ज्यादा होती है। रसायनों के कारण अमलीय वर्षा भी होती है जो कि फसलों को खराब करती है।

वायु प्रदुषण को रोकने के उपाय– वायु प्रदुषण को रोकना बहुत ही आवश्यक है अन्यथा धीरे धीरे हमें बिमार बनाते जाएगा। इसे रोकने के बहुत से उपाय हैं-

1. लोगों को नीजी वाहनों की जगह पब्लिक वाहनों का प्रयोग करना चाहिए।
2. वाहनों को सी.एन. जी. गैस से ही चलाना चाहिए।
3. फसलों के अवशेषों को जलाने की बजाय उनको खाद की तरह प्रयोग करना चाहिए।
4. उघोगों से निकलने वाले धुएँ की चिमनी काफी ऊँची होनी चाहिए।
5.ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने चाहिए।

निष्कर्ष– हर व्यक्ति को उभरने के लिए स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता है। जब तक हमारी मूल आवश्यकता हवा ही दुषित होगी तब तक हम उभर नहीं सकते। तरक्की की होड़ में इतने भी गुम मत हो जाओ कि पर्यायवरण को ही हानि पहुँचाए। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी वातावरण को स्वच्छ रखना है।

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One comment

  1. हवा, पानी, मिट्टी , वर्षा आदि मनुष्य को कुदरत के द्वारा दी गयी कुछ अनमोल वस्तुएँ हैं जिनका मनुष्य जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव रहता हैं और ये मनुष्य लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं मगर मनुष्य एक जिज्ञाशु प्राणी हैं और जिज्ञासा के कारण और विज्ञान के बल पर उसने ऐसे ऐसे आविष्कार कर लिए हैं जिनको देखकर कुदरत भी हैरान हैं मगर कुदरत के नियम या प्रकृति से छेड़ छाड़ करने का परिणाम मनुष्य को समय समय पर भोगना पड़ा हैं और भोगना पड़ेगाhttps://www.hindidarshan.com/essay-on-air-pollution-in-hindi/

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