Essay on Mehangai in Hindi- महंगाई पर निबंध

In this article, we are providing Essay on Mehangai in Hindi. महंगाई पर निबंध 500 शब्दों में।

Essay on Mehangai in Hindi- महंगाई पर निबंध

भूमिका– आज विश्व के देशों के सामने दो समस्याएँ प्रमुख हैं-मुद्रा स्फीति तथा महँगाई। जनता अपनी सरकार से माँग करती है कि उसे कम दामों पर दैनिक उपभोग की वस्तुएँ उपलब्ध करवाई जाएं। विशेषकर विकासशील देश अपनी आर्थिक कठिनाइयों के कारण ऐसा करने में असफल हो रहे हैं। लोग आय में वृद्ध की माँग करते हैं। देश के पास धन नहीं। फलस्वरूप मुद्रा का फैलाव बढ़ता है, सिक्के की कीमत घटती है, महँगाई और बढ़ती है।

महँगाई के कारण– भारत की प्रत्येक सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कम करने के आश्वासन दिए किंतु कीमतें बढ़ती ही चली गई। इस कमर तोड़ महँगाई के अनेक कारण हैं। महँगाई का सबसे बड़ा कारण होता है, उपज में कमी। सूखा पड़ने, बाढ़ आने अथवा किसी कारण से उपज में कमी हो जाए तो वस्तुओं के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। लगभग दस वर्ष पूर्व भारत को इतिहास के प्रबलतम सूखे का सामना करना पड़ा। फलस्वरूप अनाज का भारी मात्रा में आयात करना पड़ा। देश का यह बड़ा दुर्भाग्य है कि हम अभी तक अनाज के उत्पादन की दिशा में पूर्णत: स्वावलंबी नहीं हो पाए हैं। हरित क्रांति के अंतर्गत बहुत-से कार्यक्रम चलाए गए। अधिक उपज वाले बीजों का आविष्कार तथा प्रयोग बढ़ा, रासायनिक खाद के प्रयोग से भी उपज बढ़ी, किंतु हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति न हो सकी।

दूसरा बड़ा कारण है- जमाखोरी– उपज जब मंडियों में आती है, अमीर व्यापारी भारी मात्रा में अनाज एवं अन्य वस्तुएँ खरीदकर अपने गोदाम भर लेता है जिससे बाजार में वस्तुओं की कमी हो जाती है। व्यापारी अपने गोदामों की वस्तुएँ तभी निकलता है जब उसे कई गुना अधिक क़ीमत प्राप्त होती है । भारत को निरंतर अनेक युधो का सामना करना पड़ा । विषेसकरबंगला देश के सवतंत्रता संघर्ष का देश को भारी मूल्य चुकाना पड़ा ।

दोषपूर्ण वितरण प्रणाली– अन्य सरकारों की भाँति वर्तमान सरकार ने भी महंगई कम करने का आश्वासन दिया है, किंतु प्रश्न यह है कि महंगाई कम कैसे हो ? उपज में बढ़ोत्तरी हो यह आवश्यक है, किंतु हम देख चुके हैं कि उपज बढ़ने का भी कोई बहुत अनुकूल प्रभाव कीमतों पर नहीं पड़ता। वस्तुत: हमारी वितरण-प्रणाली में ऐसा दोष है जो उपभोक्ताओं की कठिनाइयों बड़ा देता है। ऐसा प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार का सवर्गारसी अजगर यहाँ भी अपना काम करें तो क़ीमतों की वृद्धि को रोका जा सकता है ।

जिम्मेदारी किस पर– आपात् स्थिति के प्रारंभिक दिनों में वस्तुओं के दाम नियत करने की परिपाटी चली थी, किंतु शीघ्र ही व्यापारियों ने पुन: मनमानी आरंभ कर दी। तेल-उत्पादक देशों द्वारा तेल की कीमत बढ़ा देने से भी महँगाई बढ़ीं है। अफ़सरशाही, लालफ़ीताशाही तथा नेताओ की शुतर्मुर्गीया नींद महँगाई के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार है।

सिंचाई सुविधाओं का अभाव– देश का कितना दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के इतने वर्ष पश्चात् भी किसानों को सिंचाई की पूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। बड़े-बड़े नुमायशी भवन बनाने की अपेक्षा सिंचाई की छोटी योजनाएँ बनाना और क्रियान्वित करना बहुत जरूरी है। हमारे सामने ऐसे भी उदाहरण आ चुके हैं जब सरकारी कागजों में कुएँ खुदवाने के लिए धन-राशि का व्यय दिखाया गया, किंतु वे कुएँ कभी खोदे ही नहीं गए।

उपसंहार– बढ़ती महँगाई पर अंकुश रखने के लिए सक्रिय राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है। यदि निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों को उचित दाम पर आवश्यक वस्तुएँ नहीं मिलेंगी तो असंतोष बढ़ेगा और हमारी स्वतंत्रता के लिए पुनः खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

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