APJ Abdul Kalam Essay in Hindi- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर निबंध

In this article, we are providing APJ Abdul Kalam essay in Hindi. In this essay, you get to know about former Indian President APJ Abdul Kalam in Hindi. इस निबंध में आपको हमारे आदर्श राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर निबंध

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले।

खुदा बन्दे से यह पूछे, बता, तेरी रजा क्या है।

भूमिका : किसी प्रसिद्ध उर्दू कवि की ऊपर लिखी पंक्तियों में व्यक्ति की लगन, परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान ये सभी विशेषताएँ झलक रही हैं। यह ठीक है कि इन विशेषताओं वाले व्यक्तियों ने ही इस संसार की शक्ल बनाई है और सँवारी है। तभी तो कवि की कल्पना यहाँ तक पहुँच गई है कि उस व्यक्ति का भाग्य विधाता स्वयं उससे पूछ कर लिखता है। संसार में गिने-चुने नाम ही ऐसे हैं जो कवि की कसौटी पर खरे उतरते हैं-अमेरिका के बाइसवें राष्ट्रपति इब्राहम लिंकन, भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, उपन्यास सम्राट् मुंशी प्रेम चन्द कुछ ऐसी विभूतियाँ हैं जिन्होंने धरती पर अंकुरित, पुष्पित और पल्लवित होकर आकाश को छू लिया है। इस गुदड़ी के लालों ने सिद्ध कर दिया है कि मानव की दृढ़ इच्छा शक्ति के सामने विधाता भी झुक गया है। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम उन्हीं विभूतियों की श्रृंखला की एक कड़ी हैं।

परिचय : भारत के आकाश का सितारा, जो आज चमकता हुआ विश्व को प्रकाश प्रदान कर रहा है, मछुआरों के एक निर्धन मुस्लिम परिवार से संबंधित है। डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में हुआ और 27 जुलाई 2015 में निधन हुआ था। जीवन में आने वाले व्यवधानों को हटाते हुए एक निर्धन बालक अपनी प्रतिभा, और लगन से आज ‘भारत रत्न’, ‘मिसाइल मैन’, ‘राकेट वैज्ञानिक’ के रूप में सारे विश्व में जाना जाता है। डॉ. कलाम ने भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को एक बार फिर उजागर कर दिया है। साथ ही यह भी सिद्ध कर दिया है कि महानता और सर्वोच्च पद किसी विशेष वर्ग की बपौती नहीं हैं।

विशेष घटना : जैसा कि भारत में पुरातन काल से छूत-छात का भाव चलता आया है, अब्दुलकलाम के साथ भी बचपन में ही साम्प्रदायिक संकीर्णता की घटना हुई, परन्तु उसके साथ एक चमत्कार भी हुआ। पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाले दो मित्र रामानन्द शास्त्री और अब्दुल कलाम कक्षा में सबसे आगे एक ही साथ बैठते थे। स्कूल में नियुक्त हुए एक नए अध्यापक ने देखा कि एक मुस्लिम लड़का रामेश्वरम मन्दिर के प्रधान पुजारी पंडित लक्ष्मण शास्त्री के बेटे के साथ बैठता है। यह तो अनर्थ है, धर्मभ्रष्ट होने वाली बात है। उस अध्यापक ने शास्त्री जी का कृपा-पात्र बनने के लिए अब्दुल कलाम को उठाकर सब से पीछे बिठा दिया। अब बच्चे इस भेद-भाव को क्या जानें। रामान्द ने यह बात अपने पिता जी को बताई। पिता ने मानव-प्रेम दर्शाते हुए अध्यापक से कहा’अब्दुल कलाम आगे रामानन्द के साथ ही बैठेगा। आप कैसे अध्यापक हैं! मानवता के स्थान पर बच्चों को संकीर्णता सिखा रहे हैं। भविष्य में यदि ऐसा हुआ तो आपको स्कूल छोड़ना पड़ेगा।” कलाम इस निर्णय से इतना प्रभावित हुआ कि तब से लेकर आज तक वे मानव को केवल मानव ही समझते आ रहे हैं। परिश्रम, लगन, ईमानदारी की शिक्षा तो डॉ. साहब को अपने माता-पिता से ही मिल चुकी थी। पिता धार्मिक विचारों के पंच नमाजी व्यक्ति थे। इस का प्रभाव छोटे ‘अबु’ पर भी पड़ा। बचपन से ही मेहनत की आदत ‘अबु’ को पड़ गई थी। पढ़ाई के साथ-साथ वे कमाई भी करने लगे थे भले काम अखबारों के बंडल ढोना ही हो।

उच्च शिक्षा : 1950 में अब्दुल कलाम ने सेंट जोजेफ़ कालिज में प्रवेश प्राप्त किया। यहाँ से उनके जीवन का एक नया अध्याय आरंभ होता है। यहीं से इनका परिचय विज्ञान से हुआ। प्रोफेसर श्रीनिवास के सम्पर्क में आने पर प्रोफेसर साहब ने इन्हें एक प्रौजैक्ट में शामिल कर लिया। डॉ. कलाम ने एम. प्राइमरी की परीक्षा पास कर ली। इस के परिणामस्वरूप उन्हें हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स बंगलौर में एक प्रशिक्षक के रूप में नौकरी मिल गई। यहाँ से उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की। इस पर डा. कलाम ने वायुसेना में इंजीनियर के रूप में प्रवेश पाने का मन बनाया। साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन विभाग मेंD.T.D.&P (Air) का फ़ार्म भी भर दिया था। वायुसेना इंजीनियर के लिए उन्हें अयोग्य करार दिया गया। वे बहुत दु:खी हुए। वे हरिद्वार चले गए। वहाँ वे स्वामी शिवानन्द जी से मिले और अपना दुख बताया। स्वामी जी ने उन्हें ढारस बँधाया और आशीर्वाद दिया कि बेटा, तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है। वस, पुरुषार्थ करो। ‘अबु’ ने अणु, परमाणु और रॉकेट के विज्ञान का अध्ययन करना प्रारंभ कर दिया। आज डॉ. अब्दुल कलाम विश्व के गिने चुने वैज्ञानिकों में से एक हैं।

विशेषताएँ : इतने ऊँचे पद पर आसीन होकर भी डॉ. कलाम को अहंकार छू तक नहीं गया है। मिसाइल विज्ञान में डॉ. कलाम ने ‘नाग’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘त्रिशूल’, ‘अग्नि’ मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इतना होने पर भी इन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने सहयोगियों को ही दिया है। इन सभी परियोजनाओं में ‘अग्नि’ मिसाइल का प्रक्षेपण डा. कलाम की महानतम् उपलब्धि है।

भारत के सर्वोच्च पद ‘राष्ट्रपति’ को प्राप्त करने पर भी वे निरहंकारी ही रहे हैं। महात्मा गाँधी की समाधि ‘राज घाट’ पर प्रणाम करने जब वे पहुँचे, तो पूर्व सभी राष्ट्रपतियों के विपरीत उन्होंने अपने बूटों के तस्मे स्वयं खोले और बाँधे। डा. कलाम को बच्चों से विशेष लगाव रहा है। क्योंकि उनकी मान्यता है कि बच्चे ही किसी राष्ट्र का भविष्य होते हैं। उनकी देख भाल अपने राष्ट्र की ही देख-भाल है।

उपसंहार : वास्तव में डा. ए. पी. जे. अब्द-उल-कलाम पहले भी वैज्ञानिक थे। राष्ट्रपति बनने पर भी वे विज्ञानी ही हैं और भविष्य में भी राष्ट्रपति पद की तुलना में | डा. कलाम एक वैज्ञानिक के रूप में अधिक जाने जाएँगे। जैसे भारत में एक परम्परा रही है कि राष्ट्रपति के पद पर आसीन होने वाला व्यक्ति राजनीति में रुचि लेने वाला, राजनैतिक गतिविधियों में अग्रणी रहने वाला, राजनैतिक कारणों से जेल काटने वाला, सत्याग्रह, अनशन आदि को अपनाने वाला व्यक्ति ही रहा है। परन्तु डा. कलाम इसके अपवाद हैं। उन्हें राजनीति से नहीं, राष्ट्र की बहुमुखी प्रगति से अनुराग है, राष्ट्र की जनता के विकास से अनुराग है, राष्ट्र की वैज्ञानिक दृष्टि से अनुराग है, राष्ट्र के बच्चों से अनुराग है, भेदभाव हीन मानव-सेवा से अनुराग है। वास्तव में ऐसा व्यक्ति ही राष्ट्र का पति होना चाहिए।

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