अनगिनती की गिनती- Akbar Birbal Ke Kisse

अनगिनती की गिनती- Akbar Birbal Ke Kisse

एक रात बादशाह अकबर बीरबल के साथ अपने महल के झरोखे में खड़े हुए थे। आसमान में चाँद खिला हुआ था और सितारे भी चमक रहे थे। तभी बादशाह अपनी ही धुन में बीरबल से पूछ बैठे, ‘बीरबल, क्या तुम मुझे आसमान में तारों की सही गिनती बता सकते हो?’

‘बिल्कुल जहांपनाह,’ बीरबल तुरंत बोले, ‘आसमान में उतने ही तारे हैं, जितने एक घोड़े के सिर पर बाल होते हैं।’

“लेकिन बीरबल,” बादशाह कुछ  सोचते हुए बोले, ‘घोड़े के सिर | पर तो अनगिनत बाल होते हैं।’ | “हुजूर, वही तो मैं कह रहा हूँ। तारे। भी आसमान में अनगिनत ही हैं।’ बीरबल छूटते ही बोले।

बीरबल का सटीक जवाब सुनकर बादशाह भौंचक्के रह गए। फिर वे हँसते हुए बोले, ‘बीरबल, हाजिरजवाबी में तुम्हारा कोई सानी नहीं। चिराग लेकर ढूँढने पर भी तुम्हारे जैसा दिमागदार कोई नहीं मिलेगा।”

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