पर्यावरण पर निबंध- Essay on Environment in Hindi

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पर्यावरण पर निबंध- Essay on Environment in Hindi

Paryavaran Suraksha Essay in Hindi ( 300 words )

पर्यायवरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि और आवरण जिसका अर्थ है एक ऐसा आवरण जो हमें चारों तरफ से घेरे हुए हैं। पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसपर पर्यायवरण मौजुद है और उसी कारण यहाँ पर जीवन संभव है। पर्यायवरण हमें हमारे जीवन के लिए सभी संसाधन जैसे हवा, पानी, भोजन आदि उपलब्ध कराता है। वातावरण का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। शुद्ध वातावरण हमें अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थय प्रदान करता है। यह पेड़ पौधों, जीव जंतुओं और मनुष्य को विकसित होने में सहायता करता है।

पर्यायवरण भी दो प्रकार के होते हैं– प्राकृतिक पर्यायवरण और कृत्रिम पर्यायवरण। प्राकृतिक पर्यायवरण हमें प्रकृति ने उपहार में दिया है और कृत्रिम वातावरण मनुष्य के द्वारा अपनी सहुलियत के अनुसार निर्मित किया गया है। पर्यायवरण हमें हर कदम पर सहायता करता है और बहुत सी मुसीबतों से हमारी सुरक्षा करता है।

आधुनिक युग में मनुष्य प्रगति की होड़ में निरंतर पर्यायवरण को हानि पहुँचाता जा रहा है। पर्यायवरण के भौतिक और रसायनिक सरंचना में असंतुलन पर्यायवरण प्रदुषण कहलाता है। मनुष्य के द्वारा निरंतर पानी, हवा , मिट्टी आदि को दुषित किया जा रहा है जिससे कि पर्यायवरण को नुकसान हो रहा है। यदि पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बनाए रखना है तो पर्यायवरण को सरंक्षित रखना होगा जिसके लिए हमें ज्यादा सो ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। कचरे की मात्रा कम करनी चाहिए और प्लास्टिक का प्रयोग बंद करना चाहिए। हमें ऐसी वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए जिन्हें बार बार प्रयोग में लाया जा सके। पर्यायवरण की सुरक्षा पूरे विश्व के लिए एक गंभीर मुद्दा है जिसके बारे में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है और इसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। हमारे पर्यायवरण को सुरक्षित रखना हम कर्तव्य है जिसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 5 जून को पर्यायवरण दिवस मनाया जाता है।

Environment Essay in Hindi ( 400 words )

पर्यायवरण का मतलब है वो चीज जो हमें चारों तरफ से घेरे हुए है। हमारे आस पास मौजुद सभी भौतिक, जीवित, अजीवित, चल, अचल चीजें मिलकर ही पर्यायवरण को बनाती है। बेहतर जिंदगी जीने के लिए मनुष्य का वातावरण अच्छा होना चाहिए । सभी गरहों में केवल पृथ्वी ही ऐसा गरह है जिसपर जीवन संभव है। जीवन संभव होने का मुख्य कारण पर्यायवरण ही है जो हमें हर पल साँस लेने के लिए हवा,पीने के लिए पानी , पेड़ पौधे जिनसे हमें भोजन मिले इन सब चीजों को उपलब्ध कराता है। प्रकृति में किसी भी वजह से असंतुलन के कारण पर्यायवरण दुषित होता जा रहा है। प्रकृति में असंतुलन का कारण मनुष्य की गतिविधियां हैं।

वातावरण के दुषित होने के कारण– हमारा वातावरण हमारे शारीरिक,मानसिक और सामाजिक विकास के लिए बहुत ही आवश्यक है। मानवीय गतिविधियों की वजह से यह प्रदुषित होता जा रहा है और जलवायु में भी बहुत से बदलाव हो रहे हैं। वातावरण के दुषित होने के कारण निम्नलिखित है-

1. दुषित जल, वायु, भूमि सब ही वातावरण को दुषित करते है।
2. मानव द्वारा लगाए गए उघोग भी हवा में जहर घोलते है और वातावरण को दुषित करते है।
3. पॉलिथीन का प्रयोग भी वातावरण को बहुत नुकसान पहुँचाता है।
4. हवा में रसायनों की वजह से तापमान भी बढ़ जाता है।

पर्यायवरण के प्रकार– पर्यायवरण प्रकृति की सबसे अनमोल देन है लेकिन मनुष्य ने अब प्राकृतिक उपहार का भी बहरूपिया बना लिया है। पर्यायवरण के दो प्रकार है-

1. प्राकृतिक पर्यायवरण- इसके अंतर्गत वो सब चीजें आती है जो हमें प्रकृति ने दी है।
2. मानव निर्मित पर्यायवरण- यह मनुष्य के द्वारा अपनी सहुलियत के हिसाब से बनाया गया है।

वातावरण के परभाव– हमारा आस पड़ोस हमारे जीवन पर बहुत ही परभाव डालता है। अगर हमारा वातावरण स्वच्छ होगा तो हम स्वस्थ रहेंगे ,खुश रहेंगे। अगर वही वातावरण दुषित होगा होगा तो हमें बहुत सी बिमारियों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही हम मानसिक रूप से भी परेशान रहेंगे।

वातावरण को स्वच्छ रखने के उपाय– हमारा वातावरण हमारे लिए बहुत ही जरूरी है। इसको साफ रखने के लिए हमें हवा, पानी, भूमि को दुषित होने से बचाना होगा। हमें कूड़ा कचरा खुले में नहीं फेंकना चाहिए। उघोग भी शहर से दूर लगाने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने चाहिए। जितना प्रदुषण कम होगा उतना ही पर्यायवरण संतुलित होगा।

निष्कर्ष– वातावरण हमारी अमूल्य धरोहर है। हम सबका कर्तव्य है कि हम इसे संभाल के रखे। अगर पर्यायवरण नही होगा तो धरती पर जीवन भी नही होगा।अतः हम सबको मिलकर इसको स्वच्छ रखना चाहिए ।

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