मुर्गा नहीं देता अंडा अकबर बीरबल का किस्सा- Akbar Birbal Ke Kisse

मुर्गा नहीं देता अंडा अकबर बीरबल का किस्सा- Akbar Birbal Ke Kisse

एक बार बादशाह अकबर की बेगम ने उन्हें बीरबल को मजाक ही मजाक में मात देने की एक तरकीब सुझाई। तरकीब बादशाह को बेहद पसंद आई और उन्होंने तुरंत उस पर अमल करने का मन बना लिया। उस दिन बीरबल के दरबार में आने के पहले ही उन्होंने सभी दरबारियों में एक-एक अंडा बाँट दिया और उन्हें उन अंडों को अपने कपड़ों में छिपा लेने का निर्देश दिया।

जब बीरबल आ गए तो बादशाह ने कहा, ‘कल मैंने सपने में देखा कि मेरे दरबार में एक हैरतअंगेज कारनामा होने वाला है। जो दरबारी मेरे लिए वफादार हैं, आज वे अंडे देंगे। इसलिए मैं चाहता हूँकि सभी दरबारी आज दरबार में अंडा देकर मेरे लिए अपनी वफादारी साबित करें। जो अंडा नहीं दे सका, उसे अपने फर्ज से डिगा हुआ समझा जाएगा।’

बादशाह की बात सुनते ही सभी दरबारी अपने कपड़ों से अंडे निकालकर खड़े हो गए बीरबल यह देखकर बड़ी हैरत में थे। वे समझ गए थे कि बादशाह ने उन्हें मजाक में उन्नीस करने के लिए ही यह सब स्वांग रचा है। वे तुरंत बोले, ‘जहांपनाह, मुझे यह बताते हुए बड़ा अफसोस है कि मैं अंडा नहीं दे सकेगा। इसका कारण यही है कि सिर्फ मुर्गियाँ ही अंडे दे सकती हैं, मुर्गे नहीं। आप मुझे मुर्गा मान लीजिए।’

बीरबल की बात सुनकर वहाँ मौजूद हाथ में अंडा लिए खड़े दरबारी शर्मिदा हो गए और बगलें झाँकने लगे। बादशाह भी हँसने लगे थे।

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