बादशाह का नगीना अकबर बीरबल का किस्सा- Akbar Birbal Ke Kisse

बादशाह का नगीना अकबर बीरबल का किस्सा- Akbar Birbal Ke Kisse

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में रहने वाले एक विदेशी प्रतिनिधि ने कहा, ‘जहांपनाह, हमारे मुल्क में कई उस्ताद वैद्य हैं जो रत्नों व मणियों से इलाज करते हैं। उनके पास ऐसे-ऐसे पत्थर हैं जो दुनिया में कहीं और मिलने नामुमकिन हैं। सोने और पीतल का अंतर जानने के लिए अक्सर इन पत्थरों का इस्तेमाल होता है। क्या आपके मुल्क में भी इस तरह की कोई चीज है?’

‘बिल्कुल है,” बादशाह बोले, ‘मेरे पास ऐसा नग है जो इससे भी बड़ी करामात कर सकता है। वह सोने और चाँदी में ही नहीं, बल्कि अच्छी और बुरी बात में भी अंतर कर सकता है।’

‘ऐसी चीज तो निश्चय ही हैरतअंगेज होगी!’ वह वैद्य बोला, ‘क्या आप मुझे वह चीज दिखा सकते हैं?’

‘बिल्कुल दिखा सकता हूँ’ कहते हुए बादशाह ने बीरबल को सामने आने का इशारा किया। सारे दरबारी और वह विदेशी प्रतिनिधि यह सब बड़ी हैरत से देख रहे थे।

‘यही है हमारा करामाती पत्थर!” बादशाह बीरबल की ओर इशारा करते हुए बोले बात में अंतर समझने की काबिलियत भी रखता है।’

‘आपने हीरे की कद्र कर ली है, बादशाह सलामत,” वह विदेशी प्रतिनिधि बोला,

‘आपका नगीना वाकई किसी भी कीमती से कीमती नगीने से बढ़कर है। हम सब आपके इस नगीने को सलाम करते हैं।’

बादशाह बड़े गर्व से बीरबल की ओर देख रहे थे।

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