Swadesh Prem Essay in Hindi- स्वदेश प्रेम पर निबंध

In this article, we are providing Swadesh Prem Essay in Hindi. स्वदेश प्रेम पर निबंध-देशप्रेम एक स्वाभाविक गण, भारतवर्ष प्यारा देश, देश के प्रति हमारा कर्त्तव्य।

Swadesh Prem Essay in Hindi- स्वदेश प्रेम पर निबंध

देशभक्ति पावन गंगा नदी के समान है जिसमें स्नान करने से मनुष्य ही नहीं, अपितु उसका मन और अंतरात्मा भी पावन हो जाती है। स्वदेश-प्रेम का अर्थ है-अपने देश या वतन की रक्षा और उसकी उन्नति के लिए अपना तन, मन और धन देश के चरणों में सौंप देना। जिस देश की धूलि में लोट-लोटकर हम बड़े हुए हैं तथा जिसके अन्न, जल और वायु का सेवन करके हम विकसित हुए हैं, उसकी सेवा न करना कृतघ्नता है। वस्तुतः माता और मातृभूमि के ऋण से आदमी आजीवन मुक्त नहीं हो सकता। इसीलिए भगवान राम ने सोने की लंका देखकर लक्ष्मण से कहा था-जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

मनुष्य में अपने देश के प्रति स्वाभाविक प्रेम होता है। मनुष्य ही क्यों, पशु-पक्षियों में भी यह गुण देखा जा सकता है। पक्षी दूर दिशाओं से उड़कर शाम को अपने घोंसलों में लौट आते हैं। गाँव से दूर वनों में चरने वाले गाय-भैंस आदि पशु भी दिन छिपते। ही अपने खूटों पर पहुँचकर सुख-शांति प्राप्त करते हैं। इसके पीछे एक कारण है-अपने स्थान से प्रेम। इसी प्रकार, मनुष्य चाहे किसी भी काम से विदेश में रहता हो परंतु उसके हृदय में अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम ज्यों-का-त्यों बना रहता है। वह अपने देश, घर और परिवार को याद करता है परंतु जिस व्यक्ति को अपनी मातृभूमि से प्रेम नहीं है वह तो पशुओं से भी निकृष्ट है। ऐसा व्यक्ति जीवन में तो अपयश प्राप्त करता ही है, मर कर भी नरक भोगता है।

हिमालय के विशाल आँगन में विद्यमान हमारा भारतवर्ष प्रिय देश है। भारत-भूमि पर ही सबसे पहले मानव । संस्कृति का आरंभ हुआ। सबसे पहले हमारे पूर्वजों ने ही ज्ञान प्राप्त किया। हमने ही संसार को यह ज्ञान दिया। हमारे यहाँ महात्मा बुद्ध जैसे अवतार हुए जिन्होंने संसार को शांति का संदेश दिया। महात्मा बुद्ध और अशोक ने यह सिद्ध कर दिखाया कि विजय केवल शस्त्रों से हीं, अपितु सत्य और अहिंसा से भी प्राप्त की जा सकती है। हमारे देश के पर्वत, नदियाँ, सागर, हरे-भरे जंगल, खेत-खलिहान सब कुछ हमारे अंदर देश के प्रति प्रेम-भावना उत्पन्न करते हैं। कविवर प्रसाद ने सही कहा है-

जिएँ तो सदा उसके लिए, यही अभिमान रहे, यह हर्ष।

निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष।।

आज हमारा भारतवर्ष स्वतंत्र है। अतः स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद देशभक्तों का कार्यक्षेत्र भी बढ़ गया है। हमें देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए। हमारे किसान और मज़दूर बहुत गरीब तथा पिछड़े हुए हैं। हमारे गाँवों में अभी भी पिछड़ापन है। हमें उनकी स्थिति को सुधारना है। असहाय और बेरोज़गारों को रोज़गार देना है। सबके लिए अन्न और वस्त्र की व्यवस्था करनी है। करोडों अनपदों को पढ़ाना है। संसार के विकसित देशों को शोषण से बचाने के लिए हमें अधिकाधिक उद्योगों का विकास करना है। यद्यपि हमारी सरकार इस दिशा में अनेक प्रयत्न कर रही है, लेकिन वे प्रयत्न पर्याप्त नहीं हैं। आज ऐसे देशभक्तों की आवश्यकता है जो अपना तन, मन और धन सभी कुछ देश के चरणों में अर्पित कर ।

हमारा भारत एक विशाल देश है। इसकी जनसंख्या एक अरब से भी अधिक पहुँच चुकी है। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद हमने। धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र की स्थापना की। हमारे यहाँ हिंदू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई आदि सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। कभी-कभी हममें विचारों की भिन्नता भी पैदा हो जाती है। यहाँ हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, तमिल तथा तेलगूआदि अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। कभी-कभी यह भाषा-मोह हमारे अंदर आपसी भेदभाव उत्पन्न कर देता है परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह हमारा अपना देश है। हमारा जन्म यहीं हुआ है। हमारे आपसी झगड़े इसे कमज़ोर बना सकते हैं। अतः हमें परस्पर स्नेह और प्रेम के साथ रहना चाहिए। उर्दू के कवि इकबाल साहब ने ठीक कहा है

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।।

हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्तां हमारा ॥

हमारी संस्कृति का मूल-मंत्र भी यही है। जो लोग धर्म के नाम पर घृणा, वैर-भाव और ईष्र्या-द्वेष फैलाते हैं, वे सच्चे भारतवासी। नहीं हैं। ऐसे लोग निश्चय ही देशद्रोही हैं।

देश की उन्नति के लिए भी स्वदेश-प्रेम आवश्यक है। जिस देश के निवासी अपने देश के कल्याण में ही अपना कल्याण । समझते हैं और देश के विकास में अपना विकास-वे अन्य देशों के सामने अपने देश का नाम ऊँचा करते हैं। देश की सामाजिक और आर्थिक उन्नति भी देशभक्त देशवासियों पर निर्भर करती है। जिन देशों के बालक, वृद्ध, स्त्रियाँ, युवक अपने देश की बलिवेदी । पर अपने स्वार्थों को न्योछावर करते हैं, वे देश ही संसार में शक्तिशाली देश समझे जाते हैं। आज हमारे हिंदुस्तान में निःस्वार्थ देशभक्तों की कमी है। यही कारण है कि हमारा देश अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाया। अतः हमें अपने देश की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए देशप्रेम की भावना का विकास करना चाहिए।

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