Essay on National Flag in Hindi- राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध

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Essay on National Flag in Hindi- राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध

राष्ट्र मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। राष्ट्र के प्रति अपनी श्रृद्धा प्रकट करने के लिए हम मूर्तियां, मंदिर, मस्जिद, धर्म-ग्रंथ, राष्ट्र-ध्वज, राष्ट्र-गान एवं संविधान आदि प्रतीक बना लेते हैं। इन सबके प्रति आदर भाव रखने का अभिप्राय देश-प्रेम के भावों को पुष्ट एवं विकसित करना है। स्वतंत्रता-प्राप्ति से पूर्व हमारे देश का कोई झंडा नहीं था। भारत में तब ‘यूनियन जैक का ही बोलबाला था। प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसरों पर इसे ही प्रमुखता मिलती थी। यहाँ तक कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशनों में भी सन् 1920 तक ‘यूनियन जैक की ही प्रतिष्ठा थी।

राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण करने का सर्वप्रथम प्रयास सन् 1905 के आस-पास हुआ। इस प्रयत्न से देश के नवयुवकों में एक नवीन जागृति का संचार हुआ। कुछ देश-प्रेमी युवक उन दिनों विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उन्होंने वहाँ देखा कि विदेशी जनसामान्य अपने देश के झंडे का कितना सम्मान करता है। उसकी रक्षा के लिए बड़े-से-बड़ा बलिदान करने को तैयार हो जाता है और जब विदेशी भारतीय युवकों से उनके राष्ट्रीय ध्वज के संबंध में कोई प्रश्न करते तो उन्हें शर्म से सिर झुका लेना पड़ता था अतः इस अपमानजनक परिस्थिति से छुटकारा पाने के लिए इन युवकों ने सोचा कि एक ऐसा राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया जाए, जिसे वे अपना कह सके तथा जिसके लिए अपना सर्वस्व बलिदान करके गौरव का अनुभव कर सके। इस प्रकार कहा जा सकता है कि । भारत के प्रथम झंडे के निर्माण की प्रथम भूमिका विदेशों में बनी।

विदेश में रह रहे भारतीय नवयुवकों ने उस समय जो झंडा तैयार किया, वह हमारे वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज से मिलता-जुलता था। उसमें नीचे की पट्टी हरी, बीच की सफेद और ऊपर की केसरिया थी, जिसे सूर्य, अर्द्ध चंद्र तथा तारे से सजाया गया था और बीच की सफेद पट्टी पर ‘वंदे मातरम् लिखा गया था। केसरिया पट्टी पर आठ कमल बने थे जो भारत के तत्कालीन आठ प्रांतों के सूचक थे, लेकिन भारतीय राजनेताओं ने इस झंडे को स्वीकार नहीं किया और उन युवकों का प्रयास असफल रहा।

सन् 1917 में डॉ० ऐनी बेसेंट तथा लोकमान्य तिलक ने एक झंडे का निर्माण किया। इस झंडे पर बड़ी-बड़ी पट्टियाँ तथा तारे थे और एक किनारे पर यूनियन जैक था। परंतु इस झंडे को भी अस्वीकार कर दिया गया। सन् 1921 में लाला हंसराज, महात्मा । गांधी के पास एक झंडा लेकर आए, जिसमें लाल और हरे रंग की दो पट्टियाँ थीं, जो भारत के दो प्रमुख समुदाय हिंदू और मुस्लिम एकता की द्योतक थीं। तब महात्मा गांधी ने अन्य धर्मों के सूचक सफेद रंग तथा चरखे के चिह्न को सम्मिलित करने का सुझाव दिया तब एक ऐसा ध्वज बनाया गया, जिसमें नीचे की पट्टी लाल, बीच की हरी तथा ऊपर की सफेद थी और इन पर चरखे का चिह भी था। हर राष्ट्रीय आयोजन में इस झंडे को गौरवपूर्ण स्थान मिलने लगा।

इस राष्ट्रीय ध्वज के सभी रंग संप्रदाय सूचक थे, इसलिए आगे चलकर उनके संबंध में अनेक मतभेद हुए। तब कांग्रेस कार्य समिति ने एक सर्वमान्य झंडा तैयार किया, जिसमें ऊपर से नीचे की ओर केसरिया, सफेद और हरा रंग थे। सफेद पट्टी पर नीले रंग का चरखा भी बनाया गया था। केसरिया रंग धैर्य तथा त्याग का, सफेद रंग सत्य और शांति का तथा हरा विश्वास, प्रताप हरियाली और समृद्धि का प्रतीक माना गया। 1931 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन में इस तिरंगे को देश के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में बहुमत से स्वीकार कर लिया गया। ।

22 जुलाई, 1947 को राष्ट्रीय ध्वज के जिस रूप को भारत की विधानसभा में स्वीकृत किया गया, उसमें एक प्रमुख परिवर्तन था। ध्वज के मध्य में चरखे के स्थान पर अशोक चक्र सम्मिलित किया गया तथा उसे भारत का राष्ट्रीय घोषित कर दिया गया । पं० जवाहरलाल नेहरु ने विधानसभा में स्वतंत्र भारत के ध्वज को प्रस्तुत करते समय घोषणा की कि हमने एक ऐसे ध्वज को रूप देने का प्रयास किया है, जो देखने में सुंदर हो, जो संयुक्त रूप में तथा अलग-अलग रूपों में भी हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति या देश की भावनाओं को अभिव्यक्त कर सके।

इस प्रकार तिरंगा झंडा हमारा राष्ट्रीय ध्वज बन गया। यह हमारे राष्ट्र का आदर्श चिन्ह है और भारत का गौरव है। देश के सभी महत्वपूर्ण आयोजनों मे इसे प्रमुखता तथा प्रतिष्ठा मिलती है। प्रतिवर्ष 15 अगस्त को हमारे देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा इसकी रक्षा का प्रण करते हैं। 26 जनवरी को देश के राष्ट्रपति राजपथ पर ध्वज फहराते हैं और सलामी लेते हैं। पहले राष्ट्रीय ध्वज केवल सरकारी भवनों पर फहराया जाता था, परंतु अब देश का हर नागरिक इसे हर भवन पर फहरा सकता है। हमारा तिरंगा झंडा हम सब भारतवाशियों की आशाओँ का जीवांत प्रतीक है तथा हम सबका यह कर्त्तव्य है कि हम अपना सर्वस्व बलिदान कर इसकी रक्षा करें। इसे देखते ही प्रत्येक भारतवासी के मुख से बरबस निकल पड़ता है-

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,

झंडा ऊँचा रहे हमारा।

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